गंगा-यमुना के जलस्तर में वृद्धि।
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साहबों के बंगले की सफाई और गमलों की सिंचाई कर परिवार की जीविका चलाने वाले रोशन का किराये का मकान मंगलवार को डूब गया। घर में आठ फीट से अधिक पानी आ गया है। इससे उसकी गृहस्थी का सारा सामान पानी में डूबकर बर्बाद हो गया। पानी में अनाज, कपड़े भीगने के बाद वह नाव की मदद से किसी तरह पत्नी और दो बच्चों को लेकर महबूब अली इंटर कॉलेज के शिविर में पहुंच गया। इसी तरह नेवादा में पानी से घिरे कई परिवारों के बच्चों को तीन दिन से दूध नहीं मिल सका है। गलियों में पानी भरने से दुकानें बंद हैं और रोजमर्रा की वस्तुओं का संकट पैदा हो गया है।
दो हजार रुपये प्रतिमाह किराये के मकान में रहकर झाड़ू, पोछा और बर्तन की धुलाई कर बच्चों को पढ़ाने, पालने वाली नेवादा की मुस्कान के कमरे में पानी भर गया है। उसका चूल्हा-चौका डूब गया। दोपहर बाद वह अपने दो बच्चों पिंकी और रीतेश के साथ सुरक्षित ठिकाने की तलाश में भटकती रही। रोशन और मुस्कान की तरह बड़ी संख्या में लोग बाढ़ की आपदा की चपेट में आकर मुसीबतों का सामना कर रहे हैं। खतरे के निशान के ऊपर जाने के बाद गंगा और यमुना इस तरह कई इलाकों में तबाही मचा रही हैं। लगातार तीसरे दिन मंगलवार को दोनों नदियों के खतरे के निशान से ऊपर बहने से करीब एक लाख से अधिक की अबादी बाढ़ के पानी की चपेट में आ गई।
बाढ़ का पानी इस दिन नेवादा की गलियों में भी भर गया। इस वजह से गलियों में खुले दर्जन भर से अधिक जनरल स्टोर और दुकानें बंद हो गईं। कछार के दर्जनों मोहल्ले टापू में तब्दील हो गए हैं। बाढ़ की वजह से हजारों की संख्या में लोग बेघर होकर रिश्तेदारों, परिचितों के यहां पहुंच गए हैं या फिर राहत शिविरों में उनका चूल्हा जल रहा है। किसी की गृहस्थी बह गई है तो कोई बाढ़ घिरने के बावजूद अभी भी घरों की छतों पर गंगा-यमुना की बाढ़ थमने की उम्मीद पाले हुए है। दारागंज-नागवासुकि मार्ग के अलावा कछार की जिन सड़कों पर हफ्ते भर पहले वाहन दौड़ रहे थे, वहीं अब गंगा और यमुना के जलाप्लावन के बीच रौद्र रूप से उन सड़कों पर नावों से भी गुजरने में लोग दिल थाम ले रहे हैं।