मैकेनिकल इंजीनियर हैं दो आरोपी
सूत्रों ने बताया कि प्रकाश व दिवेश मैकेनिकल इंजीनियर हैं और उन्होंने नोएडा के गौर सिटी स्थित कॉलेज से बीटेक किया है। सभी घटनाओं का मास्टरमाइंड प्रकाश है। उसने पूछताछ में बताया कि रंगदारी मांगने के लिए वह इन घटनाओं को अंजाम देता था। हर बार नकली बम के साथ वह एक पत्र भी रखता था, जिसमें रंगदारी मांगने की बात लिखी रहती थी।
रंगदारी की रकम वह ट्रेन में रखने और फिर इसे किसी सुनसान स्थान पर फेंकने की बात लिखा करता था। लेकिन अब तक जितनी भी घटनाएं उसने अंजाम दीं, उसमें किसी तरह की कोई रंगदारी उसे नहीं मिली। पहले वह अकेले ही घटनाएं करता था लेकिन रीवा व अन्य जगहों पर नकली बम प्लांट करने की घटना के लिए उसने अपने दोस्त व गांव के युवक को भी साथ ले लिया था।
फंडिंग के लिए खंगाले जा रहे खाते
सूत्रों का कहना है कि आरोपी भले ही रंगदारी के लिए घटनाएं करने की बात कह रहा हो लेकिन इसमें फंडिंग का भी शक है। ऐसे में उनके खाते भी खंगाले जा रहे हैं। अब तक की जांच पड़ताल में प्रकाश व दिवेश के बीच लेनदेन की बात सामने आई है लेकिन किसी अन्य खाते से दोनों के खातों में रकम भेजे जाने की बात नहीं पता चली है।
दिल्ली में रहता है, गांव आने पर करता था वारदात
पुलिस की पूछताछ में यह बात भी सामने आई है कि प्रकाश दिल्ली में वर्कशॉप में काम करता है। इससे पहले एक कॉलेज में वह पढ़ा भी चुका है। गांव लौटने पर वह यह वारदातें करता था। वह मिर्गी का मरीज भी है और 2016 में मां की मौत के बाद से वह काफी परेशान भी रहने लगा था। पूछताछ में उसने एक बार यह भी बयान दिया कि नकली बम रखने के बाद जिस तरह से सनसनी फैलती थी, उसे देखकर उसे अपने ऊपर गर्व भी होता था।
तीन आरोपियों के पकड़े जाने की सूचना पर जिला पुलिस की एक टीम ने भी रीवा पहुंचकर अभियुक्तों से पूछताछ की है। फिलहाल इन घटनाओं को अंजाम देने के पीछे उनका असली मकसद क्या था, यह स्पष्ट नहीं है। बी वारंट बनवाकर उन्हें लाया जाएगा। विस्तृत पूछताछ के बाद ही बहुत सी बातें स्पष्ट हो पाएंगी। - अजय कुमार, एसएसपी
प्रयागराज में छह घटनाओं में कबूली संलिप्तता
रीवा पुलिस की पूछताछ के दौरान आरोपियों ने जिन 13 घटनाओं में संलिप्तता की बात कबूली है, उनमें से छह प्रयागराज की है। इसके अलावा रीवा की चार के अलावा मानिकपुर, मेरठ और मिर्जापुर की एक-एक घटनाएं अंजाम देने की बात स्वीकारी है। इनमें 2016 से लगातार हो रही घटनाएं शामिल हैं। माना जा रहा है कि विस्तृत पूछताछ में उनसे कई अन्य घटनाओं का खुलासा हो सकता है। गौरतलब है कि जिले में भी 2016 से ही ऐसी घटनाओं के होने का सिलसिला शुरू हुआ था।
अफसरों को गुमराह करने में चौकी प्रभारी निलंबित
उधर अफसरों को गुमराह करने के आरोप में मेजा रोड चौकी प्रभारी मनीष सिंह बृहस्पतिवार को निलंबित कर दिए गए। जबकि इंस्पेक्टर मेजा तुषार दत्त त्यागी के खिलाफ प्रारंभिक जांच भी शुरू करा दी गई। एसएसपी अजय कुमार ने बताया कि दो फरवरी को भी मेजा रोड क्षेत्र में नकली बम मिला था जिसके साथ कुछ पत्र भी रखे गए थे। लेकिन चौकी प्रभारी ने पत्र के बारे में जानकारी छिपाए रखी। इसी मामले में उन पर कार्रवाई की गई। घटना से यह भी साफ है कि प्रभारी निरीक्षक की कार्यप्रणाली ऐसी है कि चौकी इंचार्ज उनसे झूठ बोलने का दुस्साहस कर रहा है। ऐेसे में उनके खिलाफ भी जांच शुरू करा दी गई है।