कांस्टीट्यूशनल एंड सोशल रिफार्म ने कहा कि इपेडमिक एक्ट 1897 की धारा 2(1) के तहत राज्य की जिम्मेदारी है कि वह महामारी पीड़ितों के इलाज, खर्च व मुआवजे का दायित्व वहन करे। 2020 में बने रेग्यूलेशन में इसका जिक्र नहीं किया गया है, जो कानून की मंशा के विपरीत है। सोशल रिफार्म के अध्यक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता एएन त्रिपाठी का कहना है कि होम क्वारेंटीन की अनुमति देना एक स्वागत योग्य कदम है। इस आदेश के बाद होटल व रिसार्ट को क्वारंटीन के लिए किराए पर देने के सरकारी आदेश का कोई औचित्य नहीं है।
त्रिपाठी का कहना है कि होटल, रिसार्ट को डबल बेड दो हजार, सिंगल बेड एक हजार मय भोजन किराया तय करने का सरकारी आदेश समानता के मूल अधिकारों का उल्लंघन है। इससे आम आदमी को परेशानी होगी और पहुंच वाले लोग मुफ्त सुविधाएं प्राप्त कर लेंगे। सरकार की जिम्मेदारी है कि वह संदिग्ध सहित कोरोना वायरस के सभी मरीजों के इलाज का खर्च उठाए। इसके लिए प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री राहत कोष की सहायता ली जाए और जरूरी हो तो विधायकों, सांसदों, संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों व ब्यूरोक्रेट के अनावश्यक भत्ते को रोक कर शिफ्ट किया जाए।