कोरोना संक्रमण के बढ़ते खतरे के बीच गिलोय और तुलसी के पौधों की पहुंच ज्यादातर घरों तक हो गई है। फूल-पौधों के शौकीन ज्यादातर लोगों के लॉन और गमलों में भी इन पौधों की दस्तक हो गई है। इनके पौधों की मांग बढने पर चंद्रशेखर आजाद पार्क में भी गिलोय की लतर लगाई गई है।
कोरोना से बचाव के लिए शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाना ही सबसे कारगार उपाय बताया जा रहा है। इसमें भी काढ़ा के अलावा गिलोय, अश्वगंधा, तुलसी आदि को ज्यादा प्रभावी माना जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से भी इनके इस्तेमाल की सलाह दी जा रही है। ऐसे में इनके अर्क और गोली के अलावा पौधों की भी मांग बढ़ गई है।
नया कटरा की कीर्ति ने गमले में गिलोय और तुलसी के पौधे लगा रखे हैं। सीएमपी में जंतु विज्ञान की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ.हेमलता पंत ने तो लेमन ग्रास लगा रखा है। वह इसी की चाय पीती हैं। उनका कहना है कि सर्दी, खांसी के अलावा कई अन्य बीमारियों में भी यह फायदेमंद है। चंद्रशेखर आजाद पार्क की अधीक्षक डॉ.सीमा राणा ने बताया कि इन दिनों गिलोय और तुलसी के पौधों की अचानक मांग बढ़ी है। तुलसी के पौधे पर्याप्त संख्या में पहले से हैं। अब गिलोय की लतर भी लगाई गई है।
आजाद पार्क की 15 फीसदी रह गई कमाई
कोरोना संक्रमण के दौरान चंद्रशेखर आजाद पार्क की आमदनी भी घरकर 15 फीसदी तक रह गई है। अनलाकडाउन में निर्धारित अवधि में पार्क खोलने की अनुमति दी गई है लेकिन पहले की तरह लोग नहीं आ रहे। स्थिति यह है कि इस समय रोजाना एक हजार लोग भी नहीं आ रहे। जबकि, पूर्व में औसतन रोजाना सात हजार पार्क में भ्रमण के लिए आते रहे हैं। हालांकि इसकी एक वजह पार्क का कुछ घंटों के लिए खुलना भी है। अधीक्षक डॉ.सीमा राणा ने बताया कि अब सिर्फ सुबह-शाम पार्क खुलता है। इस दौरान भी पहले जैसी भीड़ नहीं होती।
आजाद पार्क में हुआ पौधरोपण
चंद्रशेखर आजाद पार्क में पौधरोपण अभियान चला। बीएसआई के निदेशक डॉ.गोपाल सिन्हा, उप निदेशक उद्यान डॉ.विनीत, एफआरसीईआर के डॉ.संजय, इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एनबी सिंह, अधीक्षक डॉ.सीमा राणा आदि ने रीठा, बालमखीरा, महोगनी, महुआ,कटहल, नीम, ईमली के पौधे लगाए।