जैन धर्म के चौबीसवें तीर्थंकर भगवान महावीर की जयंती बुधवार को श्रद्धा एवं उल्लासपूर्वक मनाई गई। धूमधाम से शोभायात्रा निकाली गई तो विविधतापूर्ण प्रस्तुतियों के अतिरिक्त आर्यिकाओं ने प्रवचन में भगवान महावीर का शांति और अहिंसा का संदेश बांटा। डॉ. पीके भदौरा ने मंदिर जी के शिखर पर ध्वजारोहण और पूर्व उपमहानिरीक्षक डॉ अनिल जैन ने आरती उतारकर रथ को रवाना किया। आरंभ में जैन मंदिर से प्रभातफेरी निकाली गई।
जीरो रोड स्थित जैन मंदिर से आरंभ शोभायात्रा चौक, बहादुरगंज., जानसेनगंज. विवेकानंद मार्ग होते हुए जैन मंदिर पहुंचकर पूरी हुई। हाथी, घोड़े तथा लुभावन झांकियों संग जैन विद्यालय के बच्चों की प्रस्तुतियां भी आकर्षण का केंद्र रहीं। रास्ते भर श्रद्धालु झूमते रहे तो महिलाओं की टोली ने भी डांडिया नृत्य कर मुग्ध किया। पूरे रास्ते, ‘जियो और जीने दो’, अहिंसा परमोधर्म:, सत्य अहिंसा का आधार, शाकाहार-शाकाहार का जयघोष किया गया। सिर पर अहिंसा का संदेश लिखी टोपियां लगाकर अहिंसा का संदेश दिया गया।
फूलों से सुसज्जित रथ पर भगवान महावीर की प्रतिमा विराजमान थी। बग्घी पर माता-पिता के रूप में अमित जैन, ज्योति जैन, सारथी के रूप में दीपक कुमार जैन, कुबेर के रूप में दिलीप जैन तथा चारों इंद्र के वेेश में केसरिया पहने, मुकुट धारण किए निर्मल जैन, आलोक जैन, अंशु जैन, अखिलेश जैन चले। वापसी पर सुनील कुमार जैन एवं जैन साध्वी की देखरेख में संजय जैन की ओर से प्रथम स्वर्णकलश अभिषेक सहित भगवान महावीर का 108 कलशों से अभिषेक किया गया।
बाद में जैन साध्वी आर्यिका 105 विकाम्याश्री माताजी ने कहा, भगवान महावीर अहिंसा एवं मानवता के अवतार थे। उनकी शिक्षाओं से संपूर्ण विश्व का कल्याण संभव है। वह मनसा, वाचा, कर्मणा के समर्थक थे। स्वयं हिंसा करना या दूसरों से हिंसा करवाना या हिंसा का समर्थन करना, तीनों ही मनुष्य को पाप का भागीदार बनाते हैं। वह कहते थे, अहिंसा ही परम और मानव का सच्चा धर्म है। शोभायात्रा में आर्यिका 105 विगुंजनश्री माताजी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल थे। संयोजन राजेश कुमार जैन ने किया। वहीं जैन छात्रावास स्थित जैन मंदिर में भी भगवान महावीर की जयंती मनाई गई।
जयंती पर महिलाओं के बीच बालक वर्धमान का पालना झुलाने की होड़ रही। पालना झुलाने के साथ ही बधाई गीत भी गाया गया। प्राची जैन ने भजनों और जैन विद्यालय के विद्यार्थियों ने अन्य मोहक प्रस्तुतियों से मंत्रमुग्ध किया। जैन धर्मशाला परिसर में जुटे श्रद्धालुओं ने भगवान महावीर के सिद्धांतों का अनुशीलन किया।