गंदगी और गंदा पानी, हर तरफ परेशानी
0 कीड़ों के साथ मच्छरों की भरमार, दिन में बैठना, रात में नींद हराम
0 कुछ इलाकों में बिजली आपूर्ति बहाल, हजारों लोग अंधेरे में
0 सफाई में जुटे लोगों के फट रहीं हथेलियां, निकल रही खाल
प्रयागराज। बाढ़ का पानी तो उतर गया है, लेकिन दुश्वारियां बरकरार हैं। घर लौटे लोगों को सफाई के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं मिल रहा है। गंदगी के साथ गंदा पानी मुसीबत बना है। बरसाती कीड़ों और मच्छरों की भरमार है। सांप-बिच्छू जैसे जहरीले जंतुओं के निकलने से लोग सहमे हैं। पीने के लिए बोतल बंद पानी खरीदना मजबूरी बनी है। ये दिक्कतें किसी एक या दो लोगों की नहीं बल्कि हजारों लोगों की हैं, जो बाढ़ का पानी भरने से कई दिन घर छोड़ कर कहीं और या छत पर रहे।
गंगा नगर के सूरज पूरे दस दिन बाद घर लौटे हैं। उनके मुताबिक किसी तरह सफाई तो कर ली पर अभी पानी की परेशानी बनी है। मोटर जलने से टंकी नहीं भरी सो सफाई का काम बुधवार को पूरा किया किया जा सका। सूरज ने बताया साफ पानी न मिलने के कारण घर में खाना नहीं पकाया जा सका। बाहर से बाटी चोखा मंगाकर खाया।
सलोरी के सरजू मिश्रा दो दिन से घर की सफाई में जुटे हैं। चूना, दवाई के साथ पानी से दीवारों और फर्श की धुलाई की। दरवाजे,खिड़की तिरछे हो गए हैं। उन्होंने बताया कि हजारों की चपत लगी है। यही हाल करामत की चौकी, जेके नगर, करेलाबाग के सैकड़ों घरों की हैं, जहां बाढ़ का पानी तो उतरा है, लेकिन जिंदगी की गाड़ी पटरी पर नहीं आ पाई है।
गंगा के कछारी इलाके द्रौपदी घाट, राजापुर, गंगानगर, भुलई का पुरवा, नेवादा, छोटा बघाड़ा, बड़ा बघाड़ा, सलोरी, अशोक नगर में पत्रकार कॉलोनी के पीछे, मऊसरइया, ढरहरिया, ऊंचवागढ़ी, सरकुलर रोड, बेली कछार में अभी दुश्वारियां बनी हैं। दारागंज, बक्शी की सड़कें और गलियां अभी बाढ़ के पानी से लबालब है। जलकुंभी, कीचड़ और मरे जानवरों की दुर्गंध से लोग परेशान हैं। नेवादा, सरकुलर रोड, बघाड़ा की आंतरिक संकरी गलियां गंदगी से पटी हैं। नदी का पानी उतरा तो नालियों के रास्ते लोगों के घरों से निकला पानी वहां भर रहा है।
00बाढ़ प्रभावित इलाकों में बढ़ी सपेरों की पूछ
गंगा-यमुना का पानी कम होने से घरों में लौट रहे लोगों को सांप-बिच्छू जैसे जहरीले जंतुओं से परेशानी हो रही है। पानी वाला सांप देखकर भी लोग घरों के भीतर नहीं जा रहे हैं। परेड मैदान, करेली और मीरापुर में सांप पकड़ने वालों की पूछ बढ़ गई है। लोग परिचितों से जानकारी लेकर सपेरों को भी बुला रहे हैं। ऊंचवागढ़ी के राजेश कुमार ने बुधवार को सांप देखा तो कचहरी के पास से एक सपेरे को बुला लाए। पांच सौ रुपये देकर सांप पकड़वा। सपेरे ने बताया कि यह पानी वाला सांप है।
00 राजगीर,मजदूरों को खोज रहे लोग
बाढ़ प्रभावित मोहल्लों में लोग खुद तो सफाई कर ही रहे हैं, लेबर चौराहों से मजदूरों को भी पकड़ कर ला रहे हैं। किसी घर में एक तो कहीं दो या अधिक मजदूर लगाकर सफाई का काम कराया जा रहा है। सीलन के कारण लोग प्लास्टर और रंगरोगन का काम नहीं करा पा रहे हैं।
00 पीने का पानी खरीदना मजबूरी
प्रभावित मोहल्लों में बिजली और जलापूर्ति बहाल हो गई है। इसके बाद भी अधिकतर लोग नलों से गंदा पानी आने की शिकायत कर रहे हैं। सफाई और धुलाई में तो लोग नल या टंकी के पानी का इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन वह लोग पीने के लिए बोतल खरीद रहे हैं, जिनके यहां आरओ नहीं लगा है।
00बोतल बंद पानी के दाम हुए कम
बाढ़ के दौरान आरओ वाटर प्लांट बंद होने और मांग बढ़ने से चढ़े बोतल वाले पानी के दाम अब कम हो गए हैं। छोटा बघाड़ा के छात्र हरमेंद्र सिंह ने बताया कि उन्हें बुधवार को घर पर पानी की बोतल दस दिन बाद पहुंचाई गई। कुछ लोगों ने पानी खरीदा और एक बोतल के 20 रुपये ही दिए। वहीं कई मोहल्लों में अभी भी बोतल बंद पानी के 30 रुपये तक वसूले जा रहे हैं।
prayagraj- dirt and dirty water, trouble everywhere- फोटो : CITY DESK
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