मुक्त कराए गए बच्चों को मामले की जानकारी पर पहुंची चाइल्ड लाइन के सुपुर्द कर दिया गया। जहां से उन्हें बाल कल्याण समिति के मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया। बयान दर्ज करने के बाद 10 साल से कम आयु के बच्चों को राजकीय बाल गृह खुल्दाबाद और इससे ज्यादा आयु वाले बच्चों को राजकीय बाल गृह राजरूपपुर भेज दिया गया।
पुलिस ने जब बच्चों के साथ पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ की तो उनका कहना था कि वह बच्चों को पढ़ाई के लिए दिल्ली के तुगलकाबाद स्थित मदरसे में ले जा रहे थे। जिसकी मंजूरी उन्होंने बच्चों के मां-बाप से ली है। लेकिन जब उनसे यह पूछा गया कि कोविड संकट के दौरान क्या मदरसों में पढ़ाई हो रही है तो वह कोई जवाब नहीं दे सके। इसके अलावा मदरसे के प्रबंधक से बात कराने को कहने पर भी वह निरुत्तर हो गए। आशंका जताई जा रही है कि बाल श्रम व अन्य मकसदों के लिए ही तस्करी कर बच्चे ले जाए जा रहे थे।
तस्करी कर ले जाए जाने से पहले आरोपियों की ओर से बच्चों को ट्रेनिंग भी दी गई थी। इस बात का खुलासा तब हुआ जब बाल कल्याण समिति के न्यायिक मजिस्ट्रेट की ओर से उनका बयान दर्ज किया जा रहा था। दरअसल पूछने पर बच्चों का यही कहना था कि उन्हें पढ़ाई के लिए दिल्ली के तुगलकाबाद ले जाया जा रहा है। अफसर तब चौंके जब पकड़े गए सभी लोगों को ज्यादातर बच्चे अपना मामा बताने लगे।