इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि उप्र राजस्व परिषद प्रयागराज व लखनऊ में तैनात किसी भी अधिकारी का भविष्य में तबादला करें तो सदस्य की नियुक्ति करने के बाद ही उसे कार्यमुक्त किया जाए। कोर्ट ने यह आदेश सदस्यों की नियुक्ति न होने से राजस्व परिषद का कामकाज ठप होने को लेकर दाखिल याचिका पर दिया है। कोर्ट के हस्तक्षेप से राज्य सरकार ने सदस्यों की नियुक्ति की है।
कोर्ट ने कहा है कि राजस्व परिषद, प्रदेश में राजस्व व भूमि सुधार के मामलों की सुनवाई करने वाली सर्वोच्च अदालत है। यदि पद खाली रखे जाते हैं तो यह प्रदेश की जनता व वादकारियों के साथ अन्याय होगा।
यह आदेश न्यायमूर्ति अजित कुमार ने सीताराम भारती की याचिका पर दिया है। राजस्व परिषद में सदस्यों के खाली पदों को भरने के लिए दाखिल याचिका पर कोर्ट ने नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया। राज्य सरकार के अधिवक्ता ने कोर्ट को तीन सदस्यों की नियुक्ति एवं उनके कार्यभार ग्रहण करने की जानकारी दी। याची का कहना था कि पद खाली होने के कारण उसकी पुनरीक्षण अर्जी तय नहीं हो पा रही है। परिषद् सदस्य विहीन हो गया है।
कोर्ट ने राजस्व परिषद को याची के मुकदमे को चार माह में निर्णीत करने का निर्देश दिया है और कहा है कि कोर्ट के लंबित मुकदमों के निस्तारण के आदेशों वाले मामले प्राथमिकता के आधार पर तय किए जाएं।