दारागंज में पासबुक चेक करवाने वालों की लगी भीड़
फर्जीवाड़े का खुलासा होने के बाद शुक्रवार को पासबुक चेक करवाने वालों की दारागंज डाकघर में भीड़ रही। वहां निवेश करने वाले हर व्यक्ति को आशंका हो रही है कि कहीं उसका खाता फर्जी तो नहीं है। इसलिए वह खाता चेक करवाने के लिए पासबुक लेकर पहुंच रहे हैं। शुक्रवार को सुबह से पासबुक अपडेट करवाने के लिए डाकघर में लोगों की भीड़ लगी रही। डाक कर्मचारियों ने दो साै से अधिक लोगों के पासबुक चेक किए। फिलहाल, कोई खाता गड़बड़ नहीं मिला।
डाक निदेशक गाैरव श्रीवास्तव ने बताया कि जिन्होंने डाकघर में आकर पैसा जमा किया है, उनका खाते सही हैं। जो निखिल और नीति को घर पर पैसे देते थे, उन्हीं के खातों में गड़बड़ी है। उन्होंने कहा कि जिनके पास डाकघर का सही रिकॉर्ड है, उन्हीं के पैसे वापस होंगे। फर्जी पासबुक वालों की धनराशि की जिम्मेदारी डाक विभाग की नहीं है।
निखिल के पत्नी और बहन से हुई पूछताछ
मामले की जांच के लिए सात एएसपी की टीम बनाई गई है। जांच टीम ने दारागंज डाकघर में निखिल की पत्नी गाैरी श्रीवास्तव और बहन नीति से पूछताछ की। नीति ने पहले किसी भी तरह की हेराफेरी करने से इन्कार किया। उसने अपने भाई पर हेराफेरी का आरोप लगाया। कहा कि उसका अपने भाई से कोई मतलब नहीं है। इस पर डाक विभाग की टीम ने लेनदेन का हिसाब सामने रख दिया। नीति के खाते से उसका भाई लेनदेन कर रहा था। दोनों में पैसों का लेनदेन नियमित होता था। दोनों का डाकघर और एसबीआई में खाता है। इससे यह स्पष्ट हुआ कि वह झूठ बोल रही हैं। नीति ने लेनदेन के प्रपत्रों में अलग-अलग हस्ताक्षर किए। इसलिए जांच टीम के सामने वह बेनकाब हो गई।
डाकघर में संबद्ध किए गए चार कर्मचारी
एजेंट के जरिये गबन का खुलासा होने के बाद दारागंज डाकघर के पोस्टमास्टर समेत चार कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया। इसके अलावा उस डाकघर में पूर्व में काम कर चुके आठ कर्मचारियों को भी निलंबित किया गया। खासकर दारागंज के चार कर्मियों पर कार्रवाई होने से वहां का कार्य प्रभावित हो रहा था। वहां पर पासबुक चेक करवाने और अन्य कार्य के लिए लोगों की भीड़ लग रही है। इसलिए प्रवर डाक अधीक्षक अभिषेक श्रीवास्तव ने तत्काल चार कर्मचारियों को दारागंज में भेजा गया है। इसमें कचहरी से अखिलेश नारायण त्रिपाठी और साैरभ निषाद को और प्रधान डाकघर से सूरज सिंह और दिनेश को भेजा गया है। अभी इनको संबद्ध किया है। स्थायी तैनाती बाद में की जाएगी।
जिनके पैसे गए, वह भी कराएंगे मुकदमा
डाक एजेंट ने कई लोगों को करोड़ों की चपत लगाई। जिनका नुकसान हुआ है, उनमें से अब तक किसी ने मुकदमा दर्ज नहीं कराया है। आने वाले दिनों में उसमें से भी कुछ लोग एजेंट के खिलाफ ठगी का मुकदमा दर्ज करा सकते हैं। इसके अलावा डाक विभाग की ओर से भी मुकदमा दर्ज कराने की तैयारी है। इसके लिए विधिक राय ली जा रही है।