पिता बेटे की नशे की लत से परेशान था। बेटे ने घर गिरवी रख दिया था। पुलिस ने पिता रामसजीवन, रामबरन मौर्या, बबलू खटिक, बबलू मौर्या, नन्हे पासी, बड़े पासी, मुकेश पासी, राजू पासी और पप्पू उर्फ मुकरी के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया। करीब 19 साल चले ट्रायल के दौरान एडीजीसी अखिलेश सिंह बिशेन ने अभियोजन की ओर से नौ गवाहों को पेश किया।
इस दौरान साजिशकर्ता पिता राम सजीवन, राजू पासी और और पप्पू उर्फ मुकरी की मौत हो गई जबकि मुल्जिम बबलू मौर्या और मुकेश पासी फरार है। लिहाजा, इनकी पत्रावली अलग कर कोर्ट ने कार्यवाही पूरी करते हुए शेष चार मुल्जिम सघनगंज निवासी राम बरन मौर्या, तुलापुर के बब्लू खटिक, सेवईत गांव के नन्हे पासी और बड़े पासी को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास और बीस-बीस हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
बहू रेखा ने दी गवाही, कहा-ससुर थे हत्या में शामिल
मृतक मलखान की पत्नी रेखा ने गवाही में कहा कि ससुर ने ही एफआईआर दर्ज कराई थी, लेकिन हत्या में वह खुद शामिल थे। पति के नशे लती होने और घर गिरवी रखने की बात से उसने इन्कार किया। बहू की गवाही ने सुसर को साजिशकर्ता साबित कर दिया, लेकिन फैसला आने से पहले ही ससुर राम सजीवन की मौत हो गई।