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घरों में पूजा-पाठ, संगम पर लगी ग्रहण की डुबकी

Mon, 22 Jun 2020 02:14 AM IST
इलाहाबाद ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
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pooja recitration in homes eclipse dip at the confluence - फोटो : CITY DESK
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ग्रहण काल से भगवान सूर्य के मोक्ष के साथ ही रविवार को घर-घर पूजा पाठ में सारा दिन बीता। वहीं, संगम तट हर हर महादेव और गंगा-यमुना-सरस्वती के जयकारों से गूंज उठा। इस दौरान संगम पर पहले से मौजूद तीर्थ पुरोहितों और कुछ श्रद्धालुओं ने ग्रहण की डुबकी लगाई। स्नान-ध्यान के साथ ही गरीब-बेसहारों को अन्न-वस्त्र का दान भी किया गया। हालांकि मोक्ष से पहले ही भीड़ लगने से रोकने के लिए पुलिस ने संगम जाने वाले सभी रास्तों को बैरिकेडिंग लगाकर सील कर दिया था।

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prayagraj news - फोटो : prayagraj
वर्ष की सबसे बड़ी खगोलीय घटना के रूप में सूर्यग्रहण सुबह 9:16 बजे से आरंभ हो गया। लेकिन, आसमान में बादलों का डेरा होने की वजह से सूरज की किरणें धरती पर नहीं उतर सकीं। इस दौरान लोग छतों, पार्कों के अलावा खाली मैदानों से आसमान की ओर ग्रहण का नजारा लेने के लिए टकटकी लगाए रहे। हालांकि घने बादलों की ओट से ही संगम तट से कुछ लोगों ने सूर्यग्रहण को निहारने की कोशिश भी की।

prayagraj news - फोटो : prayagraj
ग्रहण लगने के साथ ही भगवान सूर्य के मोक्ष के लिए संगमनगरी में जतन शुरू हो गए। बड़े हनुमान मंदिर परिसर के अलावा संगम पर जगह-जगह सोशल डिस्टेंसिंग में जप और ध्यान शुरू हो गए। कुछ लोगों ने जल में खड़े होकर भगवान सूर्य के मोक्ष के लिए प्रार्थना की। तीर्थपुरोहित राजमणि तिवारी, रमेश कुमार मिश्र, सोहन लाल जोशी समेत कई तीर्थपुरोहितों की चौकियों पर ग्रहण के मोक्ष के लिए अनुष्ठान होते रहे।

prayagraj news - फोटो : prayagraj
ग्रहण पूरा होने के बाद दोपहर बाद 3:04 बजे जैसे ही मोक्ष हुआ संगम पर गगनभेदी जयकारे गूंजने लगे। शंखध्वनि, झांझ और घंटे के साथ भगवान सूर्य के मोक्ष की प्रार्थना की जा रही थी। मोक्ष होने के साथ ही सामाजिक दूरी का पालन करते हुए तीर्थपुरोहितों और श्रद्धालुओं ने त्रिवेणी तट पर डुबकी लगाई।
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prayagraj news - फोटो : prayagraj

मोक्ष पर गंगा जल-दूध-दही से लेटे हनुमान को कराया स्नान, मंदिरों के खुले कपाट

दोपहर 2:30 बजे से ही संगम स्थित बड़े हनुमान मंदिर में सफाई आरंभ करा दी गई। गंगा जल और दूध, दही, शहद, घी और गुड़ से लेते हनुमान को स्नान कराया गया। इसके बाद महाआरती हुई। बड़े हनुमान मंदिर के महंत और अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की मौजूदगी में मोक्ष काल के बाद लेटे हनुमान की आरती उतारी गई।

इसकेबाद शाम शाम चार बजे महाआरती के साथ मंदिर श्रद्धालुओं के लिए खोला गया। इसी तरह महाशक्तिपीठ मां ललिता देवी, मां कल्याणी देवी, मां अलोपशकंरी, हनुमत निकेतन, न्यायविद् हनुमान, अलौकिक शनिधाम, तक्षकतीर्थ, पड़िला महादेव, सोमेश्वर महादेव, नागवासुकि, वेणी माधव समेत शहर के अन्य मंदिरों के कपाट सविधि पूजन आरती के साथ आम श्रद्धालुओं के दर्शन-पूजन के लिए खोल दिए गए।

बादलों डेरे में छिपी सूर्यग्रहण की खगोलीय घटना

रविवार को दिन भर आसमान में बादल छाए रहने से सूर्यग्रहण का नजारा लोग नहीं देख सके। खगोलीय घटना बादलों के डेरे में छिपी रही। करीब चार घंटा 10 मिनट की लंबी अवधि वाले सूर्य ग्रहण को खराब मौसम की वजह से तमाम लोग नहीं देख सके। हालांकि ग्रहण देखने के लिए लोग सुबह से ही आंखों पर चश्मा, एक्स-रे फिल्म और लेंस के साथ लैस होकर खगोलीय घटना को निहारने के लिए घंटों प्रतीक्षा करते रहे, लेकिन ज्यादातर लोगों को निराशा हाथ लगी।
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