उनकी रिपोर्ट ब्रिटिश मेडिकल जनरल में छपी थी। गंगोत्री के जल में सेल्फ प्यूरीफाइंग क्वॉलिटी पाई गई थी। अन्य कई देशों की मैग्जीन में भी शोध पत्र छपे हैं। याची अरूण कुमार गुप्ता ने 28 अप्रैल 2020 को सभी शोधपत्र नेशनल क्लीन गंगा मिशन को भेजा है और महानिदेशक आईसीएमआर को भी देकर क्लिनिकल ट्रायल की अनुमति देने की मांग की है। याची गंगा प्रदूषण मामले में कायम जनहित याचिका में न्यायमित्र हैं। वह गंगा जल की बेहतरी के लिए लगे हुए हैं।
ऐसी ही रिपोर्ट भरत झुनझुनवाला ने भी भेजी थी, लेकिन आईसीएमआर ने मनमाने रवैये के आधार पर सारी रिसर्च को नकार दिया। राष्ट्रपति के सचिव ने रिपोर्ट आयुष मंत्रालय को भेजी थी, लेकिन साइंटिफिक अध्ययन के अभाव के कारण इसपर विचार ही नहीं किया गया।
साइंटिफिक अध्ययन आयुष मंत्रालय व आईसीएमआर की अनुमति के बगैर संभव नहीं है। जबकि बीएचयू के डॉक्टर की टीम ने जो नोजल स्प्रे वैक्सीन तैयार की उसके लगभग 300 लोगों पर प्रयोग के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।
एक लेख हिंदी इंटरनेशनल जर्नल आफ माइक्रोबायोलॉजी में 19 मार्च 2020 को प्रकाशित भी हुआ है। इसपर यह याचिका दाखिल की गई है और गंगा जल पर शोध से तैयार वैक्सीन का क्लिनिकल ट्रायल कराने की मांग की गई है।