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पितृ विसर्जन : संगम तट पर पितरों का श्राद्ध करने के लिए उमड़ा जनसैलाब

Wed, 06 Oct 2021 04:50 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
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Prayagraj News : पितृ विसर्जन पर संगम तट पर पिंडदान करते श्रद्धालु। - फोटो : प्रयागराज
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संगम तट पर पितृ विसर्जन के लिए बुधवार को माता-पिता, नाना-नानी समेत कई पीढ़ियों के ज्ञात-अज्ञात पूर्वजों के नाम पर पिंडदान, श्राद्ध और तर्पण-अर्पण किया गया। पितरों के मोक्ष और सुख-समृद्धि की कामना के वंशजों ने दिन भर समूहों में श्राद्ध किए। पितृ पक्ष के आखिरी दिन पूर्वांचल ही नहीं, देश के दूसरे हिस्सों से भी लोग त्रिवेणी तट पर पिंडदान के लिए पहुंचे। तीर्थपुरोहितों की चौकियों पर इसके लिए दिन भर भीड़ लगी रही। अन्न, वस्त्र के दान और मन पसंद व्यंजनों के भोग के साथ पितरों को भावपूर्ण विदाई दी गई।

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Prayagraj News : पितृ विसर्जन पर संगम तट पर पिंडदान करते श्रद्धालु। - फोटो : प्रयागराज
गंगा,यमुना और विलुप्त सरस्वती के संगम तट पर पिंडदान के लिए सुबह से भीड़ लगने लगी। मध्यप्रदेश, बिहार, झारखंड के अलावा राजस्थान, गुजरात, कर्नाटक और तमिलनाडु समेत कई राज्यों से लोग अपने पूर्वजों का संगम पर श्राद्ध करने के लिए पहुंचे। इस दौरान वेदियां बनाकर ध्वजा-पताकाएं सजाई गईं। इसके बाद विधि विधान से पिंडदान कर सुख-समृद्धि की कामना की गई।
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Prayagraj News : पितृ विसर्जन पर संगम तट पर पिंडदान करते श्रद्धालु। - फोटो : प्रयागराज
मान्यता है कि अगर पूरे पितृ पक्ष में अपने पितरों का किसी ने स्मरण न किया हो तो विसर्जन के दिन उनके नाम पर भोजन और दान कर पूर्ण फल की प्राप्ति की जा सकती है। पितरों की आत्मा की शांति के लिए संगम के अलावा रामघाट, दशाश्वमेध घाट, महावीर मार्ग पर भी गंगा किनारे श्राद्ध और पिंडदान किया गया। ज्योतिषाचार्य पं. ब्रजेंद्र मिश्र के अनुसार इस दिन ब्राह्मण को घर पर आमंत्रित कर पितरों की पसंद वाले व्यंजनों से सजी थाली परोसनी चाहिए। इसके बाद यथाशक्ति अन्न, वस्त्र और अन्य वस्तुओं का दान करना चाहिए। जो लोग किसी कारण से गया में श्राद्ध न किए हों, वह अमावस्या के दिन संगम पर पिंडदान करें तो पितरों की आत्मा को शांति मिलती है।

कौआ और गाय को पितरों के नाम पर खिलाई पूरी-खीर 
 श्राद्ध और तर्पण-अर्पण के बाद ब्राह्मणों को भोजन कराने के साथ ही गाय और कौओं को खी खीर-पूरी और रसगुल्ला खिलाया गया। मान्यता है कि चींटी और कौओं को भोजन निकाले जाने से के बाद हवन करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। कौओं को खीर खिलाने के बाद घरों में आमंत्रित ब्राह्मणों को अन्न, वस्त्र और दक्षिणा देकर विदा किया गया। पूर्वजों की मनपसंद वस्तुओं के साथ ही तिल, स्वर्ण, चांदी, घी, गुड़, फल का भी दान किया गया।
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