संगम तट पर पितरों को पिंडदान करते श्रद्धालु।
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सर्वपितृ अमावस्या (पितृ विसर्जन) पर संगम तट पर श्रद्धालुओं ने पितरों का तर्पण किया। विधि विधान से श्राद्ध कर पितरों को विदा कर उनका आशीष लिया। भोर से ही संगम तट समेत गंगा और यमुना के तमाम घाटों पर भारी भीड़ उमड़ी। इसके चलते जाम की स्थिति बन गई थी। सर्वाधिक भीड़ संगम तट पर रही। इसके अलावा दारागंज, बलुआ घाट, अरैल, रामघाट, काली घाट, सरस्वती घाट, श्रृंगवेरपुर, लालापुर, श्रृंगवेरपुर आदि घाटों पर भारी भीड़ रही। संततियों ने मोक्ष की कामना को लेकर विधि विधान से तर्पण और श्राद्ध किया।
चावल, जौ का आटा, गाय का घी, तिल को लपेटकर पिंड बनाया गया। कुशा पर रखकर पितरों का आह्वान किया गया। गंगा जल में काला तिल मिलाकर जल अर्पित किया गया। इसके बाद यथाशक्ति ब्राह्मणों को भोजन और दान दिया गया। इसके पूर्व घाट पर ही क्षौर कर्म कराया। पितृ विसर्जन के चलते घाट पर मेले जैसा दृश्य रहा। शाम तक संगम समेत अन्य घाटों पर भीड़ रही।