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फाफामऊ सामूहिक हत्याकांड : ट्विटर पर जिले का नाम इलाहाबाद लिखने पर ट्रोल हुए पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव

Sat, 27 Nov 2021 07:25 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

अखिलेश यादव के ट्विट करते ही तमाम यूजरों ने अखिलेश यादव को आड़े हाथों ले लिया और उनकी खिंचाई शुरू कर दी। कुछ यूजरों ने तो उन्हें जिहादी सोच वाला और हिंदुत्व के खिलाफ भी बता दिया। 
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सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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समाजवादी पार्टी के मुखिया और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव फाफामऊ में हुए सामूहिक नरसंहार के मुद्दे पर योगी सरकार को घेरने के चक्कर में खुद घिर गए हैं। दरअसल अखिलेश यादव ने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट से फाफामऊ की घटना पर सरकार को आड़े हाथों लेते हुए यूपी में कानून व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर रहे थे। जानबूझकर या अनजाने में उन्होंने जिले का नाम प्रयागराज न लिखकर इलाहाबाद लिख दिया है। इसको लेकर वह ट्रोल का शिकार हो गए। तमाम ट्रोलरों ने उनकी इस भूल को आड़े हाथों लेते हुए उन्हें तमाम तरह की नसीहत दे डाली। 

 

यूजर्य ने कहा- प्रयागराज बोलो भइया

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प्रयागराज की बजाय इलाहाबाद लिखने पर यूजर्स ने जमकर अखिलेश यादव को ट्रोल किया। विक्रम तिवारी नाम के यूजर ने लिखा- 'भाई, इलाहाबाद नहीं , प्रयागराज कहो। और अपराधी सपा के ही होते हैं। गेस्ट हाउस कांड याद है? एक दलित महिला के कनपटी पर रिवाल्वर रखकर उसके चीर हरण दुशासन के चेलों ने किया था। जिसे एक भाजपा नेता ने बचाया था।'


अखिलेश यादव ने लिखा- 'इलाहाबाद के फाफामऊ में दबंगों के द्वारा 4 दलितों की हत्या दलित विरोधी भाजपा सरकार पर एक और बदनुमा दाग है। घोर निंदनीय! उम्मीद है ये अपराधी बिना चश्मे के भी दिख जाएंगे...'

इलाहाबाद के फाफामऊ में दबंगों के द्वारा 4 दलितों की हत्या दलित विरोधी भाजपा सरकार पर एक और बदनुमा दाग़ है।

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घोर निंदनीय!

उम्मीद है ये अपराधी बिना चश्मे के भी दिख जाएँगे…

— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) November 27, 2021
 

भाई, इलाहाबाद नहीं , प्रयागराज कहो।
और अपराधी सपा के ही होते हैं।
गेस्ट हाउस कांड याद है?
एक दलित महिला के कनपटी पर रिवाल्वर रखकर उसके चीर हरण दुशासन के चेलों ने किया था।
जिसे एक भाजपा नेता ने बचाया था।

— Vikram Tiwari 🇮🇳 (@vikramt51) November 27, 2021

 
विक्रम साहू नाम के यूजर ने लिखा- 'जो इंसान up का मुख्यमंत्री बनने का सपना देख रहा है उसको अभी तक इतना ज्ञान नही है कि "इलाहाबाद" का नाम (प्रयागराज) है।' 

राष्ट्रवादी राठौर नाम के यूजर ने लिखा- 'इलाहाबाद की नहीं प्रयागराज की घटना है महोदय। सबके नाम बदल कर बोलते हो आप इसलिए आज कल सब आपको अलग नाम से बुलाते हैं। शुरुआत आपने ही की थी और दबंग कौन, ठाकुर ,पंडित, बनिया आखिर कौन ??? लेकिन दलित शब्द कहा से आया, ये बोलिये 4 लोगो की हत्या इसलिये चुनाव हार रहे हैं इकतरफा होकर। 
 

प्रयागराज बोलना सिख लो अखिलेशुदीन भैया..पुरानी रंजिश थी जिसने भी किया है उसे पुलिस ने पकड़ भी लिया और कुटाई भी हो रही

— Gyanendra Rai (@Rai3Gyanendra) November 27, 2021
 
 

#जय_प्रयागराज
भाई तुम अभी इलाहाबादी हो। इलाहाबाद लिख कर क्या दर्शाना चाह रहे हो। अब इलाहाबाद नहीं प्रयागराज है । तुम पहले अपनी इतिहास मे सुधार कर लो और जनरल नालेज सूधारो, तुमने प्रयागराज को इलाहाबाद लिख कर प्रयागराज की जनता का घोर अपमान किया है।

— रामचंद्र सिंह (@RamRamcsingh1) November 27, 2021
 

शिवम पांडेय नाम के यूजर ने लिखा प्रयागराज को इलाहाबाद बोलकर अपनी मानसिकता प्रकट कर रहे हैं अखिलेश यादव, इनका राष्ट्रवाद, हिंदुत्व से कोई मतलब नहीं। और तो और कानून को भी ये अपनी थाली का भोजन मान बैठे हैं। जो आज नए नाम के नए शहर को प्रगति पर बदलता हुआ नहीं देखना चाहते।
 


पं. राघवेंद्र चौबे ने लिखा इलाहाबाद, नहीं महोदय, उसका नाम प्रयागराज है, क्या आप को प्रयागराज नाम रास नहीं आ रहा है तो बता दीजिए, प्रयागराज पसंद नहीं है तो दलित, कैसे पसंद हैं, कीं इनको वोट के लिए इस्तेमाल तो नहीं कर रहे हो, जीतने के बाद इनको मक्खी की तरह निकालकर फेंक देंगे और जिहादी सोच वालों का समर्थन करने लगेंगे। 

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बता दें कि पिछले दिनों सरदार पटेल की 146वीं जयंती पर अखिलेश यादव ने पाकिस्तान के संस्थापक जिन्ना का जिक्र किया था। अखिलेश यादव ने कहा था, 'सरदार पटेल, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और जिन्ना ने एक ही संस्थान से पढ़ाई की और बैरिस्टर बने। उन्होंने भारत को आजादी दिलाने में मदद की और संघर्ष से कभी पीछे नहीं हटे। इस बयान को लेकर अखिलेश यादव लंबे समय से भाजपा के निशाने पर हैं। 

सीएम योगी आदित्यनाथ ने अखिलेश पर निशाना साधते हुए कहा था, "समाजवादी पार्टी प्रमुख ने जिन्ना की तुलना सरदार वल्लभभाई पटेल से की। यह शर्मनाक है। यह तालिबानी मानसिकता है जो देश को बांटने में विश्वास रखती है। उन्होंने कहा कि सरदार पटेल ने देश को एक सूत्र में पिरोया है।'

भूल हुई या नई चाल? 
जिन्ना के बाद प्रयागराज को इलाहाबाद लिखकर अखिलेश यादव फिर से चर्चा में हैं। सवाल उठ रहा है कि अखिलेश यादव ने ये भूल से लिख दिया है या जानबूझकर इलाहाबाद लिखा है। राजनीतिक जानकार और वरिष्ठ पत्रकार अशोक श्रीवास्तव कहते हैं, 'ये पहली बार नहीं है जब अखिलेश यादव ने इस तरह के बयान दिए हों। वह उन तमाम नामों का विरोध करते आए हैं, जिसे योगी सरकार में बदला गया है। इस वक्त भी प्रयागराज को इलाहाबाद लिखकर एक खास वर्ग का वोट पाने की चाल हो सकती है।'

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