सुबह 10.30 बजे पोस्टमार्टम हाउस से शव घर लाए गए तो वहां चीखपुकार मच गई। शवों को देखते ही परिजन फूट-फूटकर रोने लगे। परिवार की महिलाओं का रो-रोकर बुरा हाल था तो भाइयों व अन्य परिजनों की आंखों में भी आंसू थे।
फाफामऊ के गोहरी में मारे गए दंपति व दो बच्चों के शव अंतिम संस्कार के लिए दोपहर बाद फाफामऊ घाट पर ले जाए गए। इस दौरान एक साथ चार अर्थियां उठीं तो वहां मौजूद गांववालों की भी आंखें नम हो गईं। उधर परिजनों की चीत्कार से गांव में कोहराम मचा रहा। फाफामऊ घाट पर लालचंद ने भाई व अन्य परिजनों की चिताओं को मुखाग्नि दी तो उसकेआंसू छलक उठे। किसी तरह कांपते हाथों से उसने चारों शवों का अंतिम संस्कार किया।
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सुबह 10.30 बजे पोस्टमार्टम हाउस से शव घर लाए गए तो वहां चीखपुकार मच गई। शवों को देखते ही परिजन फूट-फूटकर रोने लगे। परिवार की महिलाओं का रो-रोकर बुरा हाल था तो भाइयों व अन्य परिजनों की आंखों में भी आंसू थे। मौके पर जुटे गांववाले भी गमगीन दिखे। दोपहर बाद जब एक साथ चारों अर्थियां उठीं तो एक बार फिर चीखपुकार मच गई। परिजनों का करुण क्रंदन देखकर वहां मौजूद ग्रामीण भी अपने आंसू रोक नहीं पाए।
किसी तरह नम आंखों से ही उन्होंने घरवालों को ढांढस बंधाया और तब जाकर अर्थियों को एंबुलेंस में रखकर फाफामऊ घाट पर ले जाया गया। घाट पर एक साथ परिवार के चार लोगों की चिताएं सजीं तो लोगों का कलेजा मुंह को आ गया। मृतक फूलचंद के बड़े भाई लालचंद ने कांपते हाथों से चिताओं को मुखाग्नि दी।