कोर्ट ने जुर्माना माफ करने से किया इनकार
कोर्ट ने दलील को खारिज करते हुए कहा कि धार्मिक याचिका को जनहित याचिका के रूप में पेश किया जाना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है। कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए याची फर्म पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी ठोक दिया। अदालत के सख्त रुख को देखते हुए महादेव इंटरप्राइजेज के अधिवक्ता हृदय नारायण पांडेय ने याचिका वापस लेने और जुर्माना माफ करने की गुजारिश की। कोर्ट ने याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी, लेकिन जुर्माना माफ करने से साफ मना कर दिया।
याची ने मंदिर के बाहर गन्ने की दुकान लगाने की मांगी थी अनुमति
याची मनीष खन्ना और उनकी पत्नी रेनू खन्ना ने काशी विश्वनाथ मंदिर के बाहर गन्ने की दुकान लगाने की अनुमति प्रशासन से मांगी थी। प्रशासन ने नीतिगत कारणों का हवाला देते हुए गन्ने के रस की दुकान लगाने व रस से अभिषेक कराने की अनुमति नहीं दी। इसके बाद याची ने अपनी मांग को लेकर जिलाधिकारी व नगर निगम वाराणसी के अधिकारियों को प्रार्थना पत्र दिया। जिसका निस्तारण आज तक नहीं किया गया।
इस संबंध में याची ने मुख्यमंत्री योगी को भी अर्जी भेजी है। इसके बाद याची ने जनहित याचिका दाखिल की। याचिका में यह भी कहा गया था कि ज्योतिर्लिंग पर चढ़ने वाले गन्ने के रस को याचियों द्वारा एकत्र कर गुड़ बनाया जाएगा। गन्ने का रस चढ़ने से इलाके के किसानों से गन्ने की खरीदारी भी होती है। इससे उन्हें भी फायदा होगा।