इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एमएलसी चुनाव की वोटर लिस्ट की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर हस्तक्षेप करने से इंकार करते हुए याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा है कि चुनाव प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। निर्वाचन आयोग की गाइडलाइन के तहत वोटर लिस्ट जारी की गई है। चुनाव से पहले हर बार ऐसा होता है। यदि याची को आपत्ति हो तो वह चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद उचित फोरम में जा सकता है। यह आदेश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा तथा न्यायमूर्ति समित गोपाल की खंडपीठ ने वाराणसी के सुधांशु शेखर त्रिपाठी की जनहित याचिका पर दिया है।
याचिका पर वरिष्ठ अधिवक्ता वी के उपाध्याय व आयोग के अधिवक्ता बी एन सिंह व प्रमेन्द्र प्रताप सिंह ने बहस की। याची का कहना था कि एम एल सी चुनाव की वोटर लिस्ट तैयार करने में आयोग की पांच सितंबर 2016 की गाइडलाइन का पालन नहीं किया गया है। शार्ट टर्म अध्यापकों, लिपिकों व अन्य लोगों के नामों को सूची में शामिल नहीं किया गया है। याची की आपत्तियों को दरकिनार कर वोटर लिस्ट को अंतिम रूप दिया गया है।
याचिका में गाइडलाइन का पालन करते हुए वोटर लिस्ट जारी करने और पुनरीक्षित लिस्ट से मतदान कराने की मांग की गई थी।चुनाव आयोग के वकील का कहना था कि भारतीय निर्वाचन आयोग ने दो नवंबर 20 को वोटर सूची तैयार कर संशोधित व पुनरीक्षित करने के बाद जारीकी है। हाईकोर्ट को अनुच्छेद 226 में न्यायिक पुनर्विलोकन की शक्ति प्राप्त है। किन्तु चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप से चुनाव बाधित होगा।ऐसा करना कानूनन प्रतिबंधित भी है।याची चाहे तो चुनाव बाद चुनाव याचिका दायर कर सकता है। कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी है।