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पूर्व पीठ करेगी बंधक संपत्ति बेचने के अधिकार पर सुनवाई

Sat, 07 Nov 2020 07:36 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
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court - फोटो : prayagraj
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सरफेसी एक्ट के तहत लोन वसूली कार्यवाही में बंधक संपत्ति बेचने का जिलाधिकारी  द्वारा  धारा 14 में आदेश जारी करने से पहले संपत्ति स्वामी को सुनवाई का मौका दिया जाना जरूरी है या धारा 13(4) की कार्यवाही पर्याप्त है? इस मुद्दे पर न्यायिक निर्णयों में मतभिन्नता को देखते हुए प्रकरण पूर्णपीठ को संदर्भित कर दिया गया है। अब इस पर हाईकोर्ट के तीन जजों की पीठ सुनवाई कर इस सवाल को तय करेगी। 
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बैंक का कहना है कि धारा 13(4) की कार्यवाही प्रक्रिया की लोन लेने वाले को पूरी जानकारी होती है। इस धारा में लोन अदा न करने पर बैंक को बंधक संपत्ति बेच कर वसूली का अधिकार है। ऐसे में जिलाधिकारी द्वारा संपत्ति बेचने की अनुमति देते समय सुनवाई के लिए एक बार फिर से संपत्ति के स्वामी को नोटिस देना जरूरी नहीं है। बाम्बे हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट के फैसलों ने इसकी पुष्टि की है।

किन्तु इसके विपरीत कुमकुम तेतिवाल केस में यह फैसला दिया गया है कि जिलाधिकारी को संपत्ति बेचने का आदेश जारी करने से पहले लोन लेने वाले को नोटिस देकर सुनवाई का मौका देना अनिवार्य है। अन्यथा कार्यवाही अवैध होगी। कोर्ट ने कहा कि इस वैधानिक मुद्दे पर पूर्णपीठ विचार करे। पूर्णपीठ गठित करने के लिए पत्रावली मुख्य न्यायाधीश को भेज दी गई है। यह आदेश न्यायमूर्ति एस पी केशरवानी तथा न्यायमूर्ति जयंत बनर्जी की खंडपीठ ने प्रयागराज के जैनुल आब्दीन की याचिका पर दिया है। याचिका पर अधिवक्ता  आनंद पांडेय व बैंक ऑफ बडौदा के अधिवक्ता अविनाश जायसवाल ने बहस की। 
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प्रकरण के अनुसार याची ने 29 दिसंबर 2009 को 21लाख 74हजार 398 रुपये का,लोन लिया।और बदले में  तालुका आदमपुर के गांव कादिलपुर का प्लाट संख्या 226 रकबा 0ऽ497 हेक्टेयर जमीन बंधक रख दी।याची लोन अदा नहीं कर सका। उसका खाता एनपीए घोषित कर दिया गया। 

बैंक ने धारा 13(4) में 14 फरवरी 15को वसूली कार्यवाही शुरू की।याची को नोटिस दिया।लोन अदा न करने पर भी डीएम प्रयागराज ने धारा 14 के तहत बंधक संपत्ति बेचने का आदेश जारी किया। जिसकी वैधता को चुनौती दी गई है। यह भी सवाल उठा कि डीएम के आदेश के खिलाफ अपील दाखिल की जा सकती है। याचिका पोषणीय नहीं है। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के हवाले से कहा कि हाईकोर्ट में याचिका दायर करने कर रोक नहीं है।

दूसरा सवाल उठा कि डीएम को संपत्ति बेचने का आदेश जारी करने से पहले नैसर्गिक न्याय के दरवाजे बंद नहीं करने चाहिए। सुनवाई का मौका देना चाहिए। ऐसे में कार्यवाही अवैध है।बंधक संपत्ति बेचने का आदेश देने से पहले सुनवाई का मौका देना चाहिए या नहीं,मुद्दा फैसले के लिए पूर्णपीठ को संदर्भित कर दिया गया है।
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