इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पांच साल तक खनन पट्टे का इस्तेमाल करने के बावजूद 210 पेड़ न लगाने की शर्त का पालन न करने पर जारी वसूली नोटिस पर हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया है। छह दिसम्बर 19को जिलाधिकारी मिर्जापुर ने पेड़ की मालियत 630000रूपये तय करते हुए इसकी वसूली कार्यवाही करने का आदेश दिया है। जिसकी वैधता को चुनौती दी गई थी।
यह आदेश न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल तथा अजय भनोट की खंडपीठ ने ठेकेदार सुशील कुमार सिंह की याचिका पर दिया है ।याचिका का प्रतिवाद राज्य सरकार के अधिवक्ता बी पी सिंह कछवाहा ने किया।
चुनार के सेमरा गांव के निवासी याची के पक्ष में तहसीलदार ने पांच एकड़ जमीन बालू,पत्थर खनन ठेका पांच वर्ष के लिए स्वीकृत किया। ठेके की शर्त थी कि खनन कर वह 210पेड़ लगाएंगे। ठेकेदार ने खनन कर लिया किन्तु कोई पेड़ नहीं लगाया। कहा कि पेड़ लगाए थे,जानवरों ने नष्ट कर दिया है। जांच के बाद जिलाधिकारी ने लगने वाले पेड़ों की कीमत का आंकलन कराया और याची से वसूली का निर्देश दिया है।
छह दिसम्बर 2001से पांच दिसम्बर 2006 तक पेड लगाए जाने थे।एक भी पेड़ जमीन पर नहीं है। इसका खुलासा आडिट रिपोर्ट में हुआ।याची यह दस्तावेज नहीं दिखा सका कि उसने पेड़ लगाए थे।केवल यही कहा कि उसे सुने बगैर आडिट रिपोर्ट पर वसूली की जा रही है। कोर्ट ने कहा कि पेड़ लगाने की शर्त खनन के बाद भूमि का विकास करने के लिए लगाई गई थी। ऐसे मामले में हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता ।कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी है ।