केस एक : मूल रूप से शंकरगढ़ निवासी किशोरी ने पबजी खेलने से रोकने पर फांसी लगाने की कोशिश की। परिजनों ने उसे किसी तरह बचाया। बाद में उसे मेंटल ओपीडी में लाया गया, तब उसकी लत दूर हुई। केस दो : एजी ऑफिस के कर्मचारी को पबजी खेलने की लत ऐसी लगी कि उसके कामकाज पर भी असर पड़ने लगा। परिजन उसे मेंटल हेल्थ ओपीडी में ले गए तब जाकर उसकी लत छूटी।
प्रयागराज। ऊपर दिए गए दो मामले तो सिर्फ उदाहरण हैं। वास्तव में पबजी के आदी किशोरों-युवाओं की संख्या अपने शहर में भी कम नहीं। कॉल्विन अस्पताल में चल रही में नेशनल मेंटल हेल्थ प्रोग्राम की ओपीडी में रोजाना ऐसे मामले पहुंच रहे हैैं। पबजी पर बैन लगने से ऐसे बहुत से परिवारों की दिक्कत कुछ कम जरूर होगी।
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नेशनल मेंटल हेल्थ प्रोग्राम के तहत देश भर के चुनिंदा अस्पतालों में मेंटल हेल्थ ओपीडी चलाई जा रही है। शहर में यह व्यवस्था कॉल्विन अस्पताल में लागू है। मेंटल हेल्थ ओपीडी के चिकित्सकों का कहना है कि आज के दौर में फिजिकल हेल्थ के साथ ही एक बड़ी चुनौती खुद को मानसिक रूप से स्वस्थ बनाए रखना भी है। पबजी जैसे गेम न सिर्फ किशोरों बल्कि बच्चों के भी मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डाल रहे हैं। महीने भर में ई 20 से 22 केस ऐसे आ चुके हैं। जिसमें अभिभावकों की शिकायत थी कि पबजी के चलते बच्चों की पढ़ाई तो प्रभावित हुई ही, उनके व्यवहार में भी परिवर्तन आ गया। कई मामलों में तो लगातार पबजी खेलने की वजह से बच्चों-किशोरों का व्यवहार हिंसक तक हो गया।
पबजी बैन के फैसले को मेंटल हेल्थ ओपीडी के डॉक्टर बिल्कुल सही मानते हैं। उनका यह भी कहना है कि इससे पबजी के लती हो चुके किशोरों, युवाओं, बच्चों के परिवारी जनों को काफी हद तक राहत मिलेगी।
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पत्नी को थी पबजी खेलने की लत, तलाक तक पहुंच गया मामला
मेंटल हेल्थ ओपीडी के चिकित्सकों की मानें तो ऐसा नहीं है कि कि पबजी की लत का शिकार होने वाले सिर्फ बच्चे या किशोर हैं। बड़ी संख्या में युवा भी इस समस्या से ग्रसित हैं। ऐसा ही एक केस आया जिसमें पत्नी के पबजी खेलने की लत से परेशान पति उसे लेकर चिकित्सकों के पास आया था। कैंट क्षेत्र में रहने वाले युवक ने बताया कि उसकी पत्नी पबजी खेलने के चक्कर में रोजमर्रा के काम पर भी ध्यान नहीं देती, बल्कि स्वभाव से भी बेहद चिड़चिड़ी होती जा रही है। हालात यह हो गए हैं कि मामला तलाक तक पहुंच गया। बाद में साइकोथेरेपी के जरिए उसका उपचार किया गया, तब जाकर उसकी लत छूटी।
मेंटल हेल्थ ओपीडी में लगभग हर रोज एक ऐसा मामला आता है, जिसमें अभिभावक या परिवार वाले अपने बच्चों या किसी सदस्य के पबजी का लती होने की समस्या से परेशान हैं। पबजी पर बैन लगाने से काफी परिवारों को राहत मिलेगी। -डॉ .राकेश पासवान मनोचिकित्सक
ऑनलाइन गेमिंग के और भी विकल्प मौजूद हैं लेकिन अपने विशेष तरह के टास्क व लाइव अनुभव के लिए पबजी बहुत ज्यादा लोकप्रिय है। टास्क पूरा करने का दबाव ही उनके व्यवहार में चिड़चिड़ापन व अन्य बदलाव का कारण बनता है। इसे बैन करने का फैसला बिल्कुल सही है। अभिभावकों को चाहिए कि इस मौके का फायदा उठाते हुए वह बच्चों को इस नशे से दूर ले जाते हुए उन्हें रचनात्मक कार्यों के लिए प्रेरित करें। -डॉ. ईशान्या राज, क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट