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पीसीएस 2020 : कटऑफ से अधिक अंक पाने के बाद भी फेल, प्रारंभिक परीक्षा पर उठे सवाल

Sun, 17 Apr 2022 11:39 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

पीसीएस-2020 की प्रारंभिक परीक्षा में सामान्य ग्रुप (एग्जीक्यूटिव ग्रुप) में अनारक्षित वर्ग और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित श्रेणी में अंतिम अभ्यर्थी के प्राप्तांक 110 थे। यानी न्यूनतम कटऑफ अंक 110 था, लेकिन इससे अधिक अंक पाने वाले दो अभ्यर्थियों को प्रारंभिक परीक्षा में सफल घोषित नहीं किया गया।
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UPPSC - फोटो : Social media
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विस्तार
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पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा के प्राप्तांक और कटऑफ अंक जारी होने के बाद उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) फिर विवादों के घेरे में है। दो ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां न्यूनतम कटऑफ से अधिक अंक होने के बावजूद अभ्यर्थियों को प्रारंभिक परीक्षा में सफल घोषित नहीं किया गया। अभ्यर्थी अब न्यायालय की शरण में जाने की तैयारी कर रहे हैं। 

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आयोग ने 13 अप्रैल को पीसीएस-2019 और पीसीएस-2020 की प्रारंभिक परीक्षा के प्राप्तांक एवं कटऑफ अंक जारी किए थे।


पीसीएस-2020 की प्रारंभिक परीक्षा में सामान्य ग्रुप (एग्जीक्यूटिव ग्रुप) में अनारक्षित वर्ग और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित श्रेणी में अंतिम अभ्यर्थी के प्राप्तांक 110 थे। यानी न्यूनतम कटऑफ अंक 110 था, लेकिन इससे अधिक अंक पाने वाले दो अभ्यर्थियों को प्रारंभिक परीक्षा में सफल घोषित नहीं किया गया। इन अभ्यर्थियों ने प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति से संपर्क किया है, ताकि उनकी बात उचित फोरम पर रखी जा सके।

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अभ्यर्थियों ने परीक्षा परिणाम में त्रुटि होने का लगाया आरोप

एक ओबीसी अभ्यर्थी के पीसीएस-2020 की प्रारंभिक परीक्षा में 113 अंक हैं, जबकि ओबीसी वर्ग में न्यूनतम कटऑफ 110 अंक है। वहीं, एक सामान्य अभ्यर्थी के पीसीएस प्री-2020 में 120 अंक हैं, जबकि अनारक्षित वर्ग का न्यूनतम कटऑफ भी 110 अंक है। दोनों अभ्यर्थी पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा के द्वितीय प्रश्नपत्र में उत्तीर्ण हैं। ओबीसी अभ्यर्थी को द्वितीय प्रश्नपत्र में 84 अंक और सामान्य अभ्यर्थी को द्वितीय प्रश्नपत्र में 116 अंक मिले हैं। द्वितीय प्रश्नपत्र में न्यूनतम 66 अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों को क्वालीफाई माना जाता है।


दोनों अभ्यर्थियों ने प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम त्रुटिपूर्ण होने का आरोप लगाया है। प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के अध्यक्ष अवनीश पांडेय का कहना है कि आयोग को इस मामले की जांच करानी चाहिए और अगर गलती हुई तो इसमें सुधार करना चाहिए। योग्य अभ्यर्थियों के भविष्य से खिलवाड़ नहीं होना चाहिए। 


‘दोनों अभ्यर्थियों के ऑनलाइन फॉर्म की जांच कराई गई है। पीसीएस और सहायक वन संरक्षक (एसीएफ)/क्षेत्रीय वन अधिकारी (आरएफओ) की प्रारंभिक परीक्षा एक साथ होती है। दोनों अभ्यर्थियों ने ऑनलाइन फॉर्म में सिर्फ एसीएफ/आरएफओ का विकल्प भरा है। इसी वजह से पीसीएस परीक्षा में दोनों के अभ्यर्थन पर विचार नहीं किया गया।’ - जगदीश, सचिव, यूपीपीएससी
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