इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गोरखपुर के सामाजिक कार्यकर्ता परवेज परवाज को सामूहिक दुष्कर्म के आरोप में मिली कैद व जुर्माने की सजा निलंबित करते हुए जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गोरखपुर के सामाजिक कार्यकर्ता परवेज परवाज को सामूहिक दुष्कर्म के आरोप में मिली कैद व जुर्माने की सजा निलंबित करते हुए जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है। साथ ही अपील को अंतिम सुनवाई के लिए 28 जुलाई को पेश करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा तथा न्यायमूर्ति मनीष कुमार निगम की खंडपीठ ने दिया है। परवेज ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ वर्ष 2007 में उनके विवादित बयान को लेकर प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
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याची के अधिवक्ता सैयद फरमान अहमद नकवी का कहना था कि उसे झूठा फंसाया गया है। उसके खिलाफ ठोस सबूत नहीं है। दो विवेचना अधिकारियों के साइट प्लान में अंतर है। विवेचकों द्वारा पीड़िता की उम्र दर्ज करने में गलती की गई है। मेडिकल जांच में चोटें नहीं हैं। थाना राजघाट क्षेत्र में जून माह में 10.30 बजे रात की घटना बताई गई है। याची 68 साल का वृद्ध है। घटना के समय उसकी आयु 63 साल थी। एक केस की हिस्ट्री है, जिस पर हाईकोर्ट ने रोक लगा रखी है। सरकारी अधिवक्ता ने इन तथ्यों व कथनों का खंडन नहीं किया, किंतु जमानत का विरोध किया।