अब पुलिस भर्ती तथा आरओ-एआरओ भर्ती परीक्षाओं के पेपर आउट के मामले के बाद राजकीय मुद्रणालय से प्रश्न पत्र छपवाने की मांग फिर शुरू हो गई है। राजकीय मुद्रणालय के एक वरिष्ठ अफसर का कहना है कि करीब 15 साल पहले तक लोक सेवा आयोग के पेपर भी मुद्रणालय में छपते थे। तब तक इस तरह की कोई शिकायत नहीं आई थी।
प्रिंटिंग एंड स्टेशनरी मिनिस्टीरियल एसोसिएशन के महामंत्री ध्रुव नारायण ने भी इसकी मांग की है। उनका कहना है कि जांच के बाद स्पष्ट हुआ है कि कई भर्ती परीक्षाओं के पेपर निजी प्रिंटिंग प्रेस से ही लीक हुए हैं। राजकीय मुद्रणालय से पेपर छपते तो ऐसा नहीं होता। ध्रुव का कहना है कि सिक्योरिटी प्रेस की स्थापना को लेकर संगठन की ओर से मुद्रणालय के निदेशक अभिषेक प्रकाश से कई बार वार्ता की गई लेकिन बात आगे नहीं बढ़ पाई। वहीं अभिषेक प्रकाश का कहना है कि सिक्योरिटी प्रेस का प्रस्ताव है लेकिन उसके स्टेटस के बारे में अभी नहीं बताया जा सकता।
लखनऊ में जल्द सिक्योरिटी प्रेस बनेगा, प्रयागराज के लिए भी दबाव
भर्ती परीक्षाओं के पेपर के अलावा सरकार की ओर से कई गोपनीय दस्तावेज भी निजी प्रेस में छपवाए जाते हैं। इससे इनकी गोपनीयता को लेकर सवाल बना रहता है। हालांकि मुद्रणालय के अफसरों का कहना है कि जल्द ही इस तरह की शिकायतों से राहत की उम्मीद है।
अफसरों का कहना है कि सब कुछ योजना की मुताबिक रहा तो लखनऊ में सिक्योरिटी प्रेस की स्थापना एक साल में हो जाएगी। मुद्रणालय के उपनिदेशक श्याम नारायण गुप्ता का कहना है कि जमीन चिह्नित करने के साथ पैसा भी मिल गया है। उनका कहना है कि प्रयागराज स्थित मु्द्रणालय परिसर में भी सिक्योरिटी प्रेस के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। इसके लिए फिर से प्रयास किए जाएंगे।