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Loksabha Chunav : फकीराबाद बाग में पंडित नेहरू ने दिया था भाषण, मसूरियादीन के लिए मांगे थे वोट

Mon, 18 Mar 2024 02:29 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

1957 के चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के उम्मीदवार मसूरियादीन के लिए पंडित नेहरू अपनी रॉल्स रॉयस कार से सरायअकिल चुनाव प्रचार करने आए थे। उन्होंने किसान मजदूर प्रजा पार्टी के खिलाफ फकीराबाद स्थित बाग में भाषण देकर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के चुनाव चिन्ह दो बैलो की जोड़ी पर जनता से वोट मांगा था। उस समय पंडित नेहरू का भाषण सुनने के लिए गांव गांव से पैदल ही लोग पहुंच गए थे।
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जवाहरलाल नेहरू - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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कौशांबी लोक सभा सीट तत्कालीन इलाहाबाद डिस्ट्रिक्ट (ईस्ट) कम जौनपुर डिस्ट्रिक्ट (वेस्ट) सीट से दो सांसद चुने जाते थे। सुरक्षित सीट से 1957 में दूसरी बार भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से चुनाव जीते मसूरियादीन पासी के लिए पंडित जवाहरलाल नेहरू सरायअकिल रॉल्स रॉयस कार से प्रचार करने आए थे। तब उनका स्वागत कस्बे के जमीनदार रामकृपाल सिंह ताल्लुकेदार ने किया था। उन्होंने फकीराबाद स्थित बाग में भाषण देकर दो बैलो की जोड़ी चुनाव चिन्ह पर जानता से वोट मांगा था।

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  चायल तहसील के पदुमनाथपुर सुरसेनी निवासी सेवानिवृत प्रधानाचार्य व पूर्व ब्लाक प्रमुख राधेश्याम मिश्रा एवं जवाहरगंज निवासी इलहाबाद मिल्क को-आपरेटिव डेयरी फेडरेशन (पराग) के पूर्व चेयरमैन नन्हुक लाल सिंह देश के दूसरे सबसे बड़े चुनाव को याद करते हुए बताते हैं कि तब इलाहाबाद डिस्ट्रिक्ट (ईस्ट) कम जौनपुर डिस्ट्रिक्ट (वेस्ट) सीट से दो सांसद चुने जाते थे। पहली सामान्य सीट से देश के प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू चुनाव लड़ते थे। जबकि सुरक्षित दूसरी सीट से मसूरियादीन पासी चुनाव लड़ते थे।

1957 के चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के उम्मीदवार मसूरियादीन के लिए पंडित नेहरू अपनी रॉल्स रॉयस कार से सरायअकिल चुनाव प्रचार करने आए थे। उन्होंने किसान मजदूर प्रजा पार्टी के खिलाफ फकीराबाद स्थित बाग में भाषण देकर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के चुनाव चिन्ह दो बैलो की जोड़ी पर जनता से वोट मांगा था। उस समय पंडित नेहरू का भाषण सुनने के लिए गांव गांव से पैदल ही लोग पहुंच गए थे।

पंडित नेहरू कस्बे के जमीनदार रामकृपाल सिंह ताल्लुकेदार के घर 10 मिनट रुकने के बाद चावल मंडी स्थित विद्या अलंकार विद्यालय भी गए थे। पंडित नेहरू के भाषण का ही असर था कि जनता ने मसूर्यादीन को भारतीय मजदूर प्रजा पार्टी के खिलाफ भारी मतो से विजयी बनाया था। उस दौरान गांव में बहुत कम लोगों के पास रेडियो हुआ करता था। चुनाव परिणाम की जानकारी रेडियो से मिला करती थी।
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एक दर्जन से अधिक गांव का मतदान केंद्र हुआ करता था तिल्हापुर

देश की आजादी के कई वर्षो तक गांव गांव न स्कूल की व्यवस्था नहीं थी। जवाहरगंज के सेवानिवृत बुजुर्ग अध्यापक संगम लाल विश्वकर्मा याद करते हुए बताते हैं कि इलाके में एक मतदान केंद्र तिल्हापुर में हुआ करता था। जहां पदुमनाथपुर सुरसेनी, जवाहरगंज, दरहा, गोविंदपुर, हासिमपुर किनार, जैतपुर पूरेहजारी समेत एक दर्जन से अधिक गांव के लोग मतदान करने पैदल ही पांच किलो मीटर जाया करते थे। इससे मतदान प्रतिशत भी कम हो जाता था। धीरे धीरे कुछ दिनों के बाद मतदान केंद्रो की संख्या बढ़ती गई। 1990 तक ज्यादातर गांव में मतदान केंद्र बन गए थे।
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