इलाहाबाद हाईकोर्ट की स्थापना के 150 वर्ष पूरा होने के उपलक्ष्य में एडवोकेट्स एसोसिएशन द्वारा आयोजित समारोह के मुख्य अतिथि पश्चिम बंगाल के राज्यपाल और वरिष्ठ अधिवक्ता केशरीनाथ त्रिपाठी ने कहा है कि अधिवक्ता न्याय व्यवस्था के अंग हैं, इसलिए उनको इसके विपरीत काम नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से आम जनता में न्यायपालिका के प्रति निष्ठा कम होगी, जिससे सामाजिक वैमनस्यता पैदा होती है। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका के भीतर और बाहर न्यायाधीशों की आलोचना नहीं करनी चाहिए, क्योंकि ऐसा करने से लोगों के मन में न्याय व्यवस्था के प्रति अविश्वास पैदा होगा।
राज्यपाल ने वकीलों को नसीहत देते हुए कहा कि इस हाईकोर्ट की बहुत ही उच्च परंपराएं रही हैं, जिनका पालन करने की वकीलों की जिम्मेदारी है। कहा कि वकीलों को कभी आत्मविश्वास नहीं खोना चाहिए। निरंतर अध्ययन से ज्ञान और आत्मविश्वास दोनों बढ़ता है। अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने जूनियर अधिवक्ताओं से कहा कि अपने वरिष्ठों से परामर्श लेने में कभी संकोच नहीं करना चाहिए। वकीलों को तर्क करते समय कभी धैर्य नहीं खोना चाहिए, क्योंकि इससे कुतर्क पैदा होता है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे सुप्रीमकोर्ट के न्यायाधीश राजेश कुमार अग्रवाल ने कहा कि इस हाईकोर्ट की एक प्रतिष्ठा है, इसे बनाए रखने के लिए कार्य किया जाना चाहिए। अधिवक्ता आत्मचिंतन करें और संस्था को आगे ले जाने का प्रयास करें। सुप्रीमकोर्ट के न्यायाधीश अशोक भूषण ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की स्थापना और इसकी उच्च परंपराओं का जिक्र करते हुए कहा कि इस उच्च न्यायालय से सभी क्षेत्रों में विभूतियां निकली हैं। इसका अतीत जितना गौरवशाली रहा है, भविष्य भी उतना ही गौरवशाली बनाने की जिम्मेदारी यहां के वकीलों की है।
पूर्व मुख्य न्यायाधीश एचएन सेठ ने अधिवक्ता संगठनों से गलती करने वाले वकीलों की निंदा करने का आह्वान किया ताकि बार और बेंच के संबंध सौहार्दपूर्ण बने रहें। हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश वीके शुक्ल ने समारोह के आयोजन के लिए वकीलों को बधाई दी। लोकायुक्त जस्टिस संजय मिश्र, जस्टिस शंभूनाथ सिंह और विधि आयोग के अध्यक्ष जस्टिस रवींद्र सिंह ने भी समारोह को संबोधित किया। अतिथियों का स्वागत एसोसिएशन के अध्यक्ष भगवती प्रसाद सिंह ने और धन्यवाद ज्ञापन महासचिव विश्राम तिवारी ने किया।
वकालत में 50 वर्ष पूरे कर चुके वकीलों को एडवोकेट्स एसोसिएशन द्वारा सम्मानित किया गया। सम्मान पाने वालों में एसएन वर्मा, विनोद स्वरूप, एसपी गुप्ता, अमरनाथ श्रीवास्तव, एनसी राजवंशी, प्रबोध गौड़, आरबी सहाय, टीएस दबास, विजय बहादुर सिंह, नामवर सिंह, एससी त्रिपाठी और ओपी श्रीवास्तव शामिल हैं। इसके अतिरिक्त 40 वर्ष वकालत में पूरे कर चुके 32 अधिवक्ताओं को भी सम्मान पत्र भेंट किया गया।