उच्च शिक्षण संस्थानों की स्वायत्तता को लेकर नई बहस छिड़ी हुई है। मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी की ओर से भी बयान जारी किया गया कि वह संस्थाओं की ऑटोनॉमी में कोई हस्तक्षेप करना नहीं चाहतीं, लेकिन इस बीच यूजीसी के एक अन्य पत्र को लेकर विवाद बढ़ सकता है। इसके अनुसार शिक्षण संस्थानों को कार्यपरिषद, विद्वत परिषद और वित्त समिति की बैठकों के साथ इनके एजेंडे की जानकारी भी मंत्रालय और यूजीसी को देनी होगी। यह जानकारी दो सप्ताह से पहले देनी होगी। इतना ही नहीं एजेंडे से बाहर किसी अन्य बिंदु पर बैठक में चर्चा भी नहीं कराई जा सकेगी। मिनट्स पर हस्ताक्षर से पहले बैठक में लिए गए निर्णयों की जानकारी भी यूजीसी को देनी होगी।
कार्यपरिषद, विद्वत परिषद की मंत्रालय के नामित सदस्य होते हैं। नियमित बैठकों की सूचना समय रहते उन्हें बैठक और एजेंडा की जानकारी दी जाती है। यूजीसी की ओर से जारी पत्र के अनुसार बैठक का पूरा डिटेल आयोग के अलावा मंत्रालय को भी भेजना होगा। तकरीबन सभी बैठकों में एजेंडे से बाहर भी महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा हो जाती है। उसकी महत्ता को देखते हुए फैसले भी लिए जाते हैं। इन निर्णयों को मिनट्स में भी शामिल किया जाता है, लेकिन शिक्षण संस्थान ऐसा नहीं कर पाएंगे।
हालांकि अफसरों का कहना है कि इस तरह का कोई नया आदेश नहीं आया है। इन संस्थानों में यूजीसी के नॉमनी शामिल होते हैं। इसलिए रिपोर्ट भेजी जाती है। इसके विपरीत अध्यापकों ने इस पर आपत्ति जताई है। डीन साइंस रहे प्रोफेसर एके श्रीवास्तव का कहना है कि यह विश्वविद्यालय की स्वायत्तता में हस्तक्षेप है। इससे रोजाना के कार्य भी प्रभावित होंगे।