फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हाईकोर्ट : नैसर्गिक न्याय के खिलाफ अवैध निर्माण हटाने और क्षतिपूर्ति वसूली का आदेश रद्द

Mon, 12 Dec 2022 10:55 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

यह आदेश न्यायमूर्ति अजित कुमार ने मुरादाबाद के ऋषिपाल सिंह सहित दो दर्जन याचिकाओं को स्वीकार करते हुए दिया है। कोर्ट ने कहा है कि विभिन्न जिलों की सभी याचिकाओं में एक समान विधि प्रश्न निहित होने के कारण एक साथ सुनवाई कर फैसला दिया है।
विज्ञापन
कोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत राजस्व संहिता की धारा 67 की कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बगैर गांव सभा की जमीन पर अतिक्रमण कर बने अवैध निर्माण हटाने तथा क्षतिपूर्ति वसूली कार्रवाई को रद्द कर दिया है और नए सिरे से नियमानुसार आदेश पारित करने के लिए प्रकरण संबंधित सहायक कलक्टर/तहसीलदार को वापस भेज दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति अजित कुमार ने मुरादाबाद के ऋषिपाल सिंह सहित दो दर्जन याचिकाओं को स्वीकार करते हुए दिया है।

 

 

कोर्ट ने कहा है कि विभिन्न जिलों की सभी याचिकाओं में एक समान विधि प्रश्न निहित होने के कारण एक साथ सुनवाई कर फैसला दिया है। याचियों का कहना था कि लेखपाल के स्थलीय निरीक्षण की एक पक्षीय रिपोर्ट पर तहसीलदार ने बिना सुनवाई का अवसर दिए अवैध कब्जा निर्धारित कर ध्वस्तीकरण तथा क्षतिपूर्ति वसूली की कार्रवाई का आदेश दिया है। यह राजस्व संहिता की धारा 67 की प्रक्रिया की अवहेलना है। इसलिए आदेश रद्द किया जाए। याची जो मुरादाबाद के लडावली गांव का निवासी है। गांव सभा से 60 वर्ष पहले समझौते के आधार पर कच्चा भवन निर्माण किया गया था, जिसे बाद में पक्का किया गया है। 

विज्ञापन

इसी तरह से अन्य मामले भी हैं। प्लॉट संख्या 285 की 81 वर्गमीटर जमीन पर अवैध कब्जा करार दिया गया है। इसे लेकर सिविल वाद पर स्थायी निषेधाज्ञा भी है। तहसीलदार ने बेदखली के अलावा याची से 74 लाख, 61 हजार, 700 रुपये की क्षतिपूर्ति तथा चार हजार हर्जाना वसूली का आदेश दिया है। अपीलीय अदालत ने नक्शा नजरी पर विश्वास कर अपील खारिज कर दी, जिसे चुनौती दी गई थी।
विज्ञापन

कोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया
कोर्ट ने कहा, सर्वे कर क्षेत्र की पैमाइश कराकर एरिया का निर्धारण नहीं किया गया। कार्रवाई में पारदर्शिता नहीं बरती गई। रिपोर्ट वास्तविक रूप से सही नहीं तैयार की गई। पूरी कार्रवाई में नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों की अवहेलना की गई ॅहै। कोर्ट ने याचिकाएं स्वीकार करते हुए आदेश रद्द कर दिया और तीन हफ्ते में याचियों की आपत्ति लेकर दो माह में अपीलें तय करने का निर्देश दिया है।


कोर्ट ने कहा, समुचित सर्वे तथा पैमाईश की जानी चाहिए। क्षतिपूर्ति सर्किल रेट से तय हो। पक्षकारों की मौजूदगी में सर्वे किया जाय। इसके बाद आपत्ति दाखिल करने का नोटिस दिया जाय। क्षतिपूर्ति का 25 फीसदी जमा करा लिया जाए। अवैध निर्माण तय होने तक हलफनामा लिया जाय कि वह नया निर्माण नहीं करेंगे। आदेश के खिलाफ  अपील पर अंतरिम अर्जी तय होने तक उत्पीड़नात्मक कार्रवाई न की जाय। अपील दाखिल होने की तिथि से दो माह के भीतर तय किया जाय। कोर्ट ने अधिकारियों को कोर्ट की गाइडलाइंस का पालन करने का भी निर्देश दिया है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें