इसी तरह से अन्य मामले भी हैं। प्लॉट संख्या 285 की 81 वर्गमीटर जमीन पर अवैध कब्जा करार दिया गया है। इसे लेकर सिविल वाद पर स्थायी निषेधाज्ञा भी है। तहसीलदार ने बेदखली के अलावा याची से 74 लाख, 61 हजार, 700 रुपये की क्षतिपूर्ति तथा चार हजार हर्जाना वसूली का आदेश दिया है। अपीलीय अदालत ने नक्शा नजरी पर विश्वास कर अपील खारिज कर दी, जिसे चुनौती दी गई थी।
कोर्ट ने कहा, सर्वे कर क्षेत्र की पैमाइश कराकर एरिया का निर्धारण नहीं किया गया। कार्रवाई में पारदर्शिता नहीं बरती गई। रिपोर्ट वास्तविक रूप से सही नहीं तैयार की गई। पूरी कार्रवाई में नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों की अवहेलना की गई ॅहै। कोर्ट ने याचिकाएं स्वीकार करते हुए आदेश रद्द कर दिया और तीन हफ्ते में याचियों की आपत्ति लेकर दो माह में अपीलें तय करने का निर्देश दिया है।
कोर्ट ने कहा, समुचित सर्वे तथा पैमाईश की जानी चाहिए। क्षतिपूर्ति सर्किल रेट से तय हो। पक्षकारों की मौजूदगी में सर्वे किया जाय। इसके बाद आपत्ति दाखिल करने का नोटिस दिया जाय। क्षतिपूर्ति का 25 फीसदी जमा करा लिया जाए। अवैध निर्माण तय होने तक हलफनामा लिया जाय कि वह नया निर्माण नहीं करेंगे। आदेश के खिलाफ अपील पर अंतरिम अर्जी तय होने तक उत्पीड़नात्मक कार्रवाई न की जाय। अपील दाखिल होने की तिथि से दो माह के भीतर तय किया जाय। कोर्ट ने अधिकारियों को कोर्ट की गाइडलाइंस का पालन करने का भी निर्देश दिया है।