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High Court : नेत्र संस्थान निदेशक पद पर विभागाध्यक्ष का ही अधिकार, वरिष्ठतम प्रोफेसर का नहीं

Thu, 12 Feb 2026 01:31 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि जब तक यह पद अलग से सृजित नहीं किया जाता, तब तक संस्थान के विभागाध्यक्ष को ही निदेशक-सह-प्रोफेसर नामित किया जाएगा, न कि वरिष्ठतम प्रोफेसर को।
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मनोहर दास नेत्र चिकित्सालय, प्रयागराज। - फोटो : अमर उजाला।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के मनोहर दास क्षेत्रीय नेत्र संस्थान में निदेशक पद के विवाद का निस्तारण कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि जब तक यह पद अलग से सृजित नहीं किया जाता, तब तक संस्थान के विभागाध्यक्ष को ही निदेशक-सह-प्रोफेसर नामित किया जाएगा, न कि वरिष्ठतम प्रोफेसर को। यह आदेश न्यायमूर्ति अनीश कुमार गुप्ता ने डॉ.अपराजिता चौधरी और डॉ.संतोष कुमार की याचिका पर दिया है।

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डॉ.अपराजिता ने याचिका दायर कर नेत्र संस्थान में डायरेक्टर कम प्रोफेसर के रूप में नामित किए जाने की मांग की। उनका कहना था कि वह संस्थान में सबसे वरिष्ठ प्रोफेसर हैं। दूसरी ओर वर्तमान विभागाध्यक्ष डॉ. संतोष ने दावा किया कि 1976 के शासनादेश के अनुसार विभागाध्यक्ष ही संस्थान के निदेशक होंगे।
कोर्ट ने कहा कि 26 जुलाई 1976 का शासनादेश स्पष्ट रूप से विभागाध्यक्ष और प्रोफेसर को ही निदेशक-सह-प्रोफेसर नामित करने का प्रावधान करता है।

20 अप्रैल 2010 के शासनादेश में भले ही निदेशक पद के लिए वेतनमान निर्धारित किया गया हो, लेकिन प्रयागराज स्थित इस संस्थान में कभी भी निदेशक का पृथक पद सृजित नहीं किया गया। कोर्ट ने पाया कि डॉ. अपराजिता का नौ मई 2025 को निदेशक पद पर नामांकन तब किया गया, जब वे विभागाध्यक्ष नहीं थीं। इसे अवैध करार देते हुए कोर्ट ने आदेश रद्द कर दिया।
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साथ ही डॉ. संतोष का चार अप्रैल और 29 अगस्त 2025 को निदेशक पद पर किया गया नामांकन वैध ठहराया गया। कोर्ट ने कहा कि जब तक शासन स्तर से मनोहर दास क्षेत्रीय नेत्र संस्थान में निदेशक का पृथक पद सृजित नहीं कर दिया जाता, तब तक संस्थान का विभागाध्यक्ष ही निदेशक-सह-प्रोफेसर पदनाम धारण करेगा।

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