अखाड़े में दांव पेच आजमाते पहलवान।
- फोटो : अमर उजाला।
लोकनाथ व्यायामशाला के रवींद्र पांडेय बताते हैं कि यह शहर दंगल का केंद्र रहा है। 1947 में देश की आजादी के बाद छुन्नन गुरु ने लोकनाथ व्यायामशाला की स्थापना की। तबसे लेकर यहां से कई नामचीन पहलवान निकल चुके हैं। लोकनाथ से ही निकले दो पहलवान देवकीनंदन पांडेय और पग्गू पहलवान को केसरी की उपाधि तक मिली। वहीं पहलवान कृष्णा ने राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में चांदी की गदा भी जीती। उनके जीते गए चांदी के दो गदों की पूजा प्रत्येक वर्ष नाग पंचमी के दिन अखाड़े में होती है, इसके बाद ही दंगल का आगाज होता है।
दारागंज के तीर्थराज कहते हैं कि मिट्टी पर पहलवानी का क्रेज खत्म होने को है। अब नई पीढ़ी के पहलवान गद्दे पर कुश्ती कर रहे हैं। वह इसलिए क्योंकि इसी कुश्ती से उन्हें खेल कोटे से करियर बन सकता है। मिट्टी पर कुश्ती तो अब पंजाब और हरियाणा में भी बस परंपरा तक ही सीमित रह गई है। सरकार चाहे तो इसे दोबारा से जिंदा कर सकती है। उन्होंने बताया कि दारागंज के अखाड़े से बाबा रघुनाथ पहलवान जैसे लोग निकले हैं, जिन्होंने पूरे देश में खुद की पहचान बनाई है। वहीं पंडित शक्तिराज पांडेय ने इसी पहलवानी के दम पर ही कस्टम विभाग में नौकरी हासिल की और राष्ट्रीय स्तर पर विभाग के लिए कई पदक जीते।
अखाड़े में दांव पेच आजमाते पहलवान।
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बंद हो चुके हैं कई अखाड़े
अखाड़ा से जुड़े तीर्थराज पांडेय और श्यामजी पाठक का कहना है कि 10 साल पहले तक शहर में दो दर्जन से अधिक अखाड़े हुआ करते थे। हर अखाड़े में पहलवानों का जमघट लगता था, लेकिन एक-एक कर दर्जन भर अखाड़े बंद हो गए। बंद होने वाले अखाड़ों में पहलवान गौरी गुरु का अखाड़ा, ललई पहलवान का अखाड़ा जो बड़े अखाड़ों में शामिल हुआ करता था वह भी शामिल है। अकेले दारागंज में ही छह बड़े अखाड़े बंद हो चुके हैं। दूसरी ओर जो अखाड़े चालू हालत में हैं वह लोकनाथ, कल्याणी देवी, दारागंज और झूंसी में ही है। इनमें सबसे बड़ा लोकनाथ व्यायामशाला और कल्याणी देवी का पंडित रामजी पाठक का अखाड़ा है। लोकनाथ व्यायामशाला की बुनियाद जाने-माने समाजसेवी छुन्नन गुरु ने डाली थी। प्रदेश स्तर पर ताज हासिल करने वाले भोला पहलवान ने इस अखाड़े को पहचान दी थी। 70 साल बीतने के बाद भी अखाड़े का रुतबा उसी तरह से कायम है, जैसे पहले हुआ करता था।
अखाड़े में दांव पेच आजमाते पहलवान।
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ऐसे तैयार होती है अखाड़े की मिट्टी
कुश्ती का खेल मिट्टी के अखाड़ों से अब गद्दे पर आ गया है।इसकी वजह है कि अखाड़े की मिट्टी बनाने में काफी मेहनत करनी पड़ती है। अखाड़े की मिट्टी को पहले छाना जाता है और पानी का छिड़काव करके मिट्टी को नरम किया जाता है। फिर मिट्टी में मट्ठा ,नीम की पत्ती और हल्दी पाउडर मिक्स करके छिड़काव किया जाता है। ताकि, पहलवानों को किसी प्रकार का संक्रमण न होने पाए।