यह आदेश न्यायमूर्ति मनोज मिश्र तथा न्यायमूर्ति विकास बुधवार की खंडपीठ ने दिनेश कुमार बियार की याचिका पर दिया है। 20 सितंबर 1951 की अधिसूचना में बियार जाति को विंध्य प्रदेश में अनुसूचित जन जाति का दर्जा दिया गया था।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश की बियार जाति को अनुसूचित जनजाति की बजाय पिछड़ी जाति में शामिल करने के खिलाफ दाखिल याचिका पर केंद्र व यूपी सरकार से चार हफ्ते में जवाब मांगा है। याचिका की अगली सुनवाई 28 नवंबर को होगी।
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यह आदेश न्यायमूर्ति मनोज मिश्र तथा न्यायमूर्ति विकास बुधवार की खंडपीठ ने दिनेश कुमार बियार की याचिका पर दिया है। 20 सितंबर 1951 की अधिसूचना में बियार जाति को विंध्य प्रदेश में अनुसूचित जन जाति का दर्जा दिया गया था। राज्य पुनर्गठन कानून-1956 के तहत विंध्य प्रदेश बंटकर कई राज्यों में शामिल हो गया। यूपी में बियार जाति को पिछड़ा वर्ग में शामिल किया गया है। जब कि मध्यप्रदेश में अभी भी बियार जाति अनुसूचित जन जाति में कायम है।
याचिका में यूपी में भी बियार जाति को अनुसूचित जनजाति घोषित करने की मांग की गई है। कोर्ट ने मुद्दे को विचारणीय माना है। इससे पहले कोर्ट ने सरकार से पूछा था कि क्या कोर्ट ऐसा आदेश जारी कर सकती है। निश्चित जानकारी न मिलने पर जवाबी हलफनामा मांगा है।