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ऑफलाइन के मुद्दे पर गरमाई सियासत

Fri, 06 May 2016 02:15 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद व‌िश्वव‌िद्यालय - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय में ऑफलाइन प्रवेश परीक्षा के मुद्दे पर शुरू आंदोलन को लेकर सियासत गरमाई गई है। भाजपा सांसदों और विधायकाें ने अनशन पर बैठे छात्र नेताओं से मिलकर आंदोलन तथा लाठीचार्ज की पूरी जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन और प्रदेश सरकार पर डालने की कोशिश की है। वहीं कांग्रेस, सपा समेत अलग-अलग दलों के छह सांसदों ने विश्वविद्यालयों में लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताते हुए केंद्र सरकार पर हमला बोला है। सीपीआई-एम के  तपन कुमार सेन ने राज्यसभा में भी यह मुद्दा उठाया।
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कांग्रेस के प्रमोद तिवारी, सीपीआई के डी.राजा, सपा के जावेद अली खान, सीपीएम के तपन सेन, जेडीयू के केसी त्यागी और एनसीपी के डीपी त्रिपाठी ने संयुक्त बयान जारी करके इलाहाबाद विश्वविद्यालय में आंदोलन कर रहे छात्रसंघ पदाधिकारियों और छात्रों पर लाठीचार्ज की कड़े शब्दों में निंदा की है। उनका कहना है हैदराबाद विश्वविद्यालय में छात्र रोहित वेमूला की आत्महत्या का मामला अभी शांत नहीं हुआ है। जेएनयू में भी छात्र नेताओं के खिलाफ कार्रवाई सबके सामने है।

अब इलाहाबाद विश्वविद्यालय में शांतिपूर्णढंग से आंदोलन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज किया गया। छात्रों की जायज मांगों को अनसुना करते हुए कुलपति कार्यालय के निर्देश पर छात्रों को पीटा गया। सांसदों का कहना है कि छात्रसंघ की अध्यक्ष ऋचा सिंह सहित अन्य छात्र नेताओं को कुलपति कार्यालय से धमकियां दी जा रही हैं। कुलपति कार्यालय ने अपनी निरंकुशता दिखाते हुए उल्टे ऋचा तथा अन्य पदाधिकारियों पर दंगा कराने की एफआईआर दर्ज करा दी।
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सांसदों का कहना है कि हैदराबाद, जेएनयू और इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय में जो घटनाएं घटी हैं वह सिर्फ विश्वविद्यालय प्रशासन की करतूत नहीं है, बल्कि, एमएचआरडी के माध्यम से भारत सरकार विश्वविद्यालयों में छात्रों की अभिव्यक्ति और लोकतांत्रिक अधिकारों की आजादी पर अंकुश लगाने का कार्य कर रही है। सांसदाें ने भारत सरकार से मांग की है कि छात्रों पर लगाए गए झूठे आरोप वापस ले और परिसर में अभिव्यक्ति की आजादी सुनिश्चित की जाए। सांसद तपन सेन ने राज्यसभा में भी इन बिंदुओं को उठाते हुए विश्वविद्यालय में छात्रों पर लाठीचार्ज की भर्त्सना की।
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