सवाल यह भी
मौके से मिले मृतका के आधार कार्ड पर अंकित पता उसी बिल्डिंग का था। दूसरे के पते पर उसने आईडी कैसे बनवा ली। आखिरी बार फ्लैट में कौन आया। सीसीटीवी फुटेज की रात में ही पड़ताल क्यों नहीं हुई। महिला की मौत सात-आठ दिन पहले हुई। उस दिन बिल्डिंग में क्या किसी संदिग्ध का आना हुआ था। फ्लैट के दरवाजे के बाहर लगी लोहे की जाली में जो ताला लगा था, वह किसका था। मॉडर्न दौर में फ्लैट के दरवाजों में ड्यूअल लॉक की व्यवस्था रहती है, तो क्या इस फ्लैट में भी था ड्यूअल लॉक?
इरादतन लापरवाही या कोई दबाव?
इस मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर कई अन्य सवाल भी उठ रहे हैं। जिस तरह से महिला संबंधी मामला होने के बावजूद तफ्तीश को लेकर ढीला रवैया अपनाया गया, उससे यह भी सवाल है कि यह लापरवाही इरादतन है या किसी दबाव में ऐसा किया जा रहा है। हाल यह रहा कि गंभीर मामला होने के बाद भी घटना की जानकारी पर कोई जिम्मेदार अफसर मौके पर नहीं पहुंचा था। यहां तक कि कोतवाली इंस्पेक्टर भी बीमार होने के चलते मौके पर नहीं पहुंचे थे। ऐसे में थाने का प्रभार देख रहे दरोगा व चौकी प्रभारी ही मौके पर पहुंचकर जांच पड़ताल करते नजर आए थे।
कहीं ऐसा तो नहीं हुआ?
अब तब जो बातें सामने आई हैं, उससे इस बात की भी आशंका जताई जा रही है कि हत्या में एक से ज्यादा लोग शामिल रहे हों। जानकारों का कहना है कि 35 साल की महिला की गला दबाकर हत्या करना अकेले व्यक्ति के लिए संभव नहीं। जिस तरह से हत्या की गई और परिस्थितियां भी इसी ओर इशारा कर रही हैं। इस बात की भी आशंका है कि हत्या में कोई न कोई ऐसा व्यक्ति शामिल रहा हो, जिसे महिला पहचानती रही हो। ऐसा न होता तो बाहरी व्यक्ति के फ्लैट में घुसने पर महिला ने शोर जरूर मचाया होता।