अब भी टालमटोल में जुटा है प्राधिकरण
प्रयागराज विकास प्राधिकरण से मानचित्र स्वीकृत कराए बगैर राजकीय आस्थान पर अवैध निर्माण होते रहे लेकिन अफसर मौन रहे। अब एसडीएम की ओर से ध्वस्तीकरण के लिए लिखे जाने के बाद भी प्राधिकरण के अफसर टालमटोल में जुटे हैं। उपाध्यक्ष अरविंद चौहान का कहना है कि मामला अब संज्ञान में आया है। जांच कराई जाएगी। यदि अवैध निर्माण है तो उसका ध्वस्तीकरण कराया जाएगा।
नहीं देखे जाते दस्तावेज, ...किसी भी जमीन की करा सकते हैं रजिस्ट्री
राजकीय आस्थान ही नहीं किसी भी जमीन की रजिस्ट्री कराई जा सकती है। निबंधन कार्यालय में दस्तावेजों की कोई छानबीन नहीं होती। पूरे दस्तावेज नहीं हैं तो भी रजिस्ट्री हो जाती है। निबंधन कार्यालय के अफसरों की मानें तो रजिस्ट्री के समय उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों के सत्यापन का उन्हें अधिकार ही नहीं है। हां, इतना जरूर है कि किसी ने रजिस्ट्री या भूखंड की स्थिति को लेकर आपत्ति की है तो क्रेता को इससे अवगत करा दिया जाता है।
एआईजी स्टांप राकेश चंद्रा का कहना है कि रजिस्ट्री के समय जो दस्तावेज उपलब्ध कराए जाते हैं। उसी आधार पर रजिस्ट्री की जाती है। क्रेता और विक्रेता से खरीद की शर्तों की बाबत स्वीकोरोक्ति ली जाती है। इसके बाद रजिस्ट्री की जाती है। यदि जमीन राजकीय आस्थान, नजूल या शत्रु संपत्ति से जुड़ी है और यह संज्ञान में आता है तो इस बाबत संबंधित विभाग को लिख दिया जाता है लेकिन क्रेता और विक्रेता सहमत हैं तो रजिस्ट्री नहीं रोकी जा सकती।