खास यह कि इसके बाद भी एजेंसियों को पोल, ड्राइवर आदि का भुगतान कर दिया गया। नियमानुसार भुगतान से पहले अवर अभियंता, सहायक अभियंता तथा अधिशासी अभियंता की ओर से पांच-पांच फीसदी पोल तथा अन्य कार्यों की रेंडम जांच करनी चाहिए। ऐसे में मानक के विपरीत पोल तथा ड्राइवर लगाने में गड़बड़ी के बावजूद भुगतान किए जाने पर इन अफसरों को भी दोषी पाया गया है। भुगतान से संबंधित फाइलों पर मुख्य अभियंता का भी हस्ताक्षर है। ऐसे में उनकी भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है।
मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत ने बताया कि जांच रिपोर्ट मिल चुकी है। एजेंसी तथा अफसर दोषी पाए गए हैं। इनके खिलाफ कार्रवाई करके नगर आयुक्त से रिपोर्ट मांगी गई है। इसी क्रम में संबंधित एजेंसियों को डिबार करने के साथ उनसे वसूली की तैयारी है। एक कंपनी को कुल साढ़े चार करोड़ का भुगतान किया जाना है। अभी तक उसे करीब पौने तीन करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है। इस तरह से शेष राशि का भुगतान नहीं किए जाने की तैयारी है। अपर नगर आयुक्त की ओर से भुगतान पर रोक भी लगा दी गई है।
इसके अलावा अवर अभियंता, सहायक अभियंता तथा अधिशासी अभियंता के खिलाफ भी कार्रवाई की तैयारी है। इनसे नुकसान की रिकवरी की जाएगी। साथ ही विभागीय कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए शासन को भी लिखा जाएगा। इस बाबत अफसरों को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया है। नगर आयुक्त चंद्रमोहन गर्ग का कहना है कि रिपोर्ट देखने के साथ जांच अधिकारियों से वार्ता के बाद सभी के खिलाफ कार्रवाई तय की जाएगी।