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Prayagraj News: अब नगर निगम खुद कराएगा कुत्तों का सर्वे

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राजरुपपुर में नगर निगम और फरीटेल्स संस्था की ओर से रेबीजटीकाकरण अ​भियान किया गया।अम - फोटो : shiv tripathi
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नगर निगम अब आवारा कुत्तों का भी विवरण जुटाएगा। कुत्तों के बढ़ते आतंक को देखते हुए सर्वे कराने का निर्णय लिया गया है। निगम की ओर से पहली बार इस तरह का सर्वे कराया जाएगा।
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अभी मुख्य पशु चिकित्साधिकारी कार्यालय की ओर से हर तरह के पशुओं की गणना की जाती है। इसके तहत आवारा कुत्तों की भी गणना कराई जाती है। नगर निगम भी इसी गणना पर निर्भर है।
निगम के पास शहरी क्षेत्र में गाय, भैंस, बकरी, कुत्तों आदि की देखभाल, उन्हें लेकर नीति बनाने, लाइसेंस जारी करने की जिम्मेदारी है लेकिन शहरी क्षेत्र में रहने वाले पशुओं की अलग से कभी गणना नहीं कराई गई। इसका नतीजा है कि निगम के पास आवारा व पालतू कुत्तों की संख्या, प्रजाति आदि को लेकर पूरी जानकारी नहीं है।
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इसकी वजह से निगम आवारा कुत्तों को लेकर ठोस नीति भी नहीं बना पा रहा है। निगम की ओर से आवारा कुत्तों के ऑपरेशन और टीकाकरण का अभियान शुरू किया गया है। इसके लिए पहले 40 से 50 हजार कुत्तों के होने का अनुमान था। इसे ध्यान में रखकर एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर का निर्माण कराया गया लेकिन अब यह संख्या सवा लाख से अधिक बताई जा रही है। ऐसे में सेंटर की क्षमता बढ़ानी पड़ी है।
निगम के पशुधन अधिकारी विजय अमृत राज का कहना है कि जल्द ही सर्वे शुरू किया जाएगा। कुत्तों की सही संख्या सामने आने के बाद इनके लिए योजना बनाने में मदद मिलेगी।

चल रहा है पालतू कुत्तों का सर्वे
नगर निगम की ओर से पालतू कुत्तों का सर्वे शुरू किया गया है। साथ में उनका पंजीकरण भी कराया जा रहा है। सर्वे में कुत्तों की प्रजाति आदि विवरण भी एकत्रित किया जा रहा है। शहर में 10 हजार पालतू कुत्ते होने की बात कही जा रही है।

निगम ने निजी संस्था संग मिलकर कुत्तों का किया टीकाकरण
नगर निगम की ओर से एक संस्था की मदद से शनिवार को अलग-अलग मोहल्लों में अभियान चलाकर आवारा कुत्तों का टीकाकरण किया गया। राजरूपपुर, कसारी मसारी, कालिंदीपुरम, चकिया, लूकरगंज, चौफटका आदि क्षेत्रों में चले अभियान के दौरान 40 से अधिक कुत्तों को टीके लगाए गए। संस्था की प्रिया श्रीवास्त, आशुतोष शर्मा, शिशिर आदि का कहना था कि इसका मकसद शहरियों के साथ कुत्तों को भी बचाना है। उनका कहना था कि लोगों को रैबिज से बचाना है न कि इन बेजुबान जानवरों को खत्म करना है।
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