प्रयागराज। प्रशासन और चिकित्सा विभाग के अफसरों के दावे सच हुए तो कोविड-19 जांच की रिपोर्ट तीन में आ जाएगी। जिला विकास समन्वय और निगरानी समिति की बैठक में मंगलवार को अफसरों ने स्पष्टीकरण दिया कि जांच के लिए स्टाफ बढ़ा दिए गए हैं। अब रिपोर्ट में देरी नहीं होगी।
कोविड-19 की जांच रिपोर्ट आने में छह से सात दिन लग जा रहे हैं, कुछ मामलों में तो हफ्तों के बाद भी रिपोर्ट नहीं मिल रही है। तब तक मरीज के संपर्क में कई लोग आ जाते हैं। अमर उजाला ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। सांसद डॉ.रीता बहुगुणा जोशी और केशरी देवी पटेल की अध्यक्षता में हुई बैठक में भी यह मुद्दा प्रमुखता से उठा। इस पर सीएमओ ने बताया कि तीन दिन के भीतर रिपोर्ट आ जाए इसके लिए कई कदम उठाए गए हैं। बैठक में होम आइसोलेशन में दी जाने वाली सुविधाओं समेत कोरोना संक्रमण से संबंधित अन्य बिंदुओं पर भी विस्तार से चर्चा हुई।
जन प्रतिनिधियों ने सफाई व्यवस्था की भी जानकारी ली और आवश्यक निर्देश दिए। निर्णय लिया गया कि सफाई, सैनिटाइजेशन, छिड़काव आदि की जानकारी जनप्रतिनिधियों को भी दी जाएगी। बैठक के बिजली विभाग के कई काम में अनियमितता का मुद्दा उठा। जनप्रतिनिधियों ने एनएंडटी कंपनी के कई काम पर आपत्ति जताई। इस पर अधिशासी अभियंता ने जांच कराने और रिपोर्ट जनप्रतिनिधियों को भी देने की बात कही। बैठक में बिना कनेक्शन कई लोगों को बिजली बिल भेजे जाने का भी मुद्दा उठा। इस पर अफसरों ने बताया कि ऐसे घरों को चिह्नित कर प्रमाण पत्र दिए जा रहे हैं। उनसे बिल की वसूली नहीं की जाएगी।
बैठक में बिजली मीटर, सिंचाई, ट्यूबेल, हैंडपंप, पेयजल योजना, मनरेगा आदि पर भी विस्तार से भी चर्चा हुई। बैठक में विधायक हर्षवर्धन वाजपेयी, विक्रमाजीत मौर्य, नीलम करवरिया, राजमणि कोल, डीएम भानु चंद्र गोस्वामी, नगर आयुक्त रवि रंजन, सीडीओ आशीष कुमार, पीडीडीआरडीए केके सिंह आदि मौजूद रहे।
बासुदेव यादव ने जिला विकास समिति का किया बहिष्कार
सोशल डिस्टेंसिंग का मुद्दा उठाते हुए सपा एमएलसी बासुदेव यादव ने जिला विकास समन्वय और निगरानी समिति की बैठक का बहिष्कार कर दिया। उनका कहना है कि कोविड 19 के नियमों का हवाला देते हुए जिला प्रशासन आम जनता को छोटी छोटी गलतियों पर जुर्माना कर रहा है। विपक्षी दलों के कार्यकर्ताओं के ऊपर कोविड का बहाना बनाकर मुकदमे कायम कर रहा है। इसके विपरीत इस बैठक में तीन गज के बजाय तीन इंच की दूरी पर बैठाया गया। इससे गंभीर संक्रमण का खतरा था।
उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि भाजपा के लोग घर घर जाकर बूथ सत्यापन कर रहे हैं। उन्हें पुलिस प्रशासन नहीं रोक रहा है, जबकि विपक्षी दलों के कार्यकर्ताओं के ऊपर मुकदमे कायम कर परेशान किया जा रहा है।