इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि बिना ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य के किसी व्यक्ति को हत्या जैसे गंभीर अपराध में ट्रायल के लिए तलब नहीं किया जा सकता। न्यायमूर्ति अनिल कुमार दशम की एकल पीठ ने बुलंदशहर के अहमदगढ़ थाने में 2013 में दर्ज हत्या के एक मामले में मजिस्ट्रेट और पुनरीक्षण अदालत की ओर से पारित समन आदेश को निरस्त कर दिया। साथ ही मजिस्ट्रेट को कानून के अनुरूप मामले पर नए सिरे से विचार करने का निर्देश दिया।
मामले में राहुल के भाई ने आरोप लगाया था कि लाला और महेश ने शराब पिलाने के बाद राहुल की हत्या कर दी। हालांकि, पुलिस जांच में आरोपों की पुष्टि न होने पर अंतिम रिपोर्ट दाखिल कर दी गई थी। शिकायतकर्ता की विरोध याचिका पर मजिस्ट्रेट ने इसे शिकायत वाद मानते हुए सात गवाहों के बयान दर्ज किए और दोनों आरोपितों को हत्या के मुकदमे में तलब कर लिया। पुनरीक्षण अदालत ने भी इस आदेश को बरकरार रखा था। इस आरोपी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।