यूपी बोर्ड ने इस बार हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा में कई नए और अहम प्रयोग किए और इसका असर भी देखने को मिला। तीन दशक में पहली बार ऐसा हुआ, जब यूपी बोर्ड का पुनर्परीक्षा नहीं करानी पड़ी और बोर्ड के 100 वर्षां के इतिहास में रिजल्ट रिकार्ड समय में जारी कर दिया गया।
यूपी बोर्ड की परीक्षा 16 फरवरी से चार मार्च तक आयोजित की गई थी। इसके बाद पुनर्मूल्यांकन 14 दिनों में पूरा कर लिया गया और बोर्ड के 100 वर्षों के इतिहास में पहली बार रिजल्ट 25 अप्रैल को जारी कर दिया गया। इससे पूर्व रिजल्ट कभी भी इतनी जल्दी जारी नहीं किया गया। बताया जा रहा है कि यूपी बोर्ड की से लागू तमाम नई व्यवस्थाओं के कारण रिजल्ट जारी करने का रिकार्ड बन सका।
यूपी बोर्ड के निदेशक डॉ. महेंद्र देव ने बताया कि 30 वर्षों के दौरान पहली बार ऐसा हुआ, जब यूपी बोर्ड की परीक्षा के दौरान न तो पेपर लीक हुआ और न ही गलत प्रश्नपत्र खोले जाने की कोई घटना हुई। नतीजा रहा कि यूपी बोर्ड को पुनर्परीक्षा नहीं करानी पड़ी और बोर्ड ने वक्त से पहले परिणाम जारी कर दिया।