इलाहाबाद विश्वविद्यालय में स्नातक प्रथम एवं द्वितीय वर्ष के विद्यार्थियों एवं परास्नातक के विभिन्न सेमेस्टरों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को बिना परीक्षा अगली कक्षा में प्रमोट कर दिया जाए, ऑटा अध्यक्ष प्रो. रामसेवक दुबे के इस प्रस्ताव का ऑटा के अन्य पदाधिकारियों और सदस्यों ने ही विरोध किया है। उनका कहना है कि प्रो. दुबे के यह व्यक्तिगत विचार हो सकते है, लेकिन उन्होंने इस प्रस्ताव को लेकर ऑटा के पदाधिकारियों एवं सदस्यों से कोई चर्चा नहीं की। वहीं, अध्यक्ष ने भी सीधे तौर पर कहा है कि यह उनका व्यक्तिगत विचार था, इससे किसी पदाधिकारी को कोई सरोकार नहीं।
ऑटा के वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रो. एआर सिद्दीकी का कहना है कि इविवि में बिना परीक्षा छात्रों को अगली कक्षा में प्रमोट किए जाने की खबर से शिक्षक, छात्र एवं उनके अभिभावक स्तब्ध हैं। ऑटा के अन्य पदाधिकारियों, सदस्यों एवं अन्य शिक्षकों से वार्ता किए बगैर ऑटा अध्यक्ष का यह बयान दुर्भाग्यपूर्ण है कि छात्रों को बिना परीक्षा अगली कक्षा में प्रमोट कर दिया जाए। उनका बयान इविवि एवं संघटक कॉलेजों के तकरीबन 61 हजार छात्रों एवं उनके अभिभावकों को भ्रमित करता है। प्रो. सिद्दीकी एवं अन्य पदाधिकारियों ने उम्मीद जताई है लॉकडाउन के बाद परास्नातक का पाठ्यक्रम पूर्ण होने के बाद ही उनकी परीक्षाएं ली जाएंगी और स्नातक की परीक्षाएं भी होंगी। पदाधिकारियों का हना है कि ऑटा अध्यक्ष को केवल शिक्षक कल्याण की बातें करनी चाहिए, जो उनका कार्यक्षेत्र है।
विवाद होने के बाद बड़ी संख्या में शिक्षकों ने ऑटा का कार्यकाल पूर्ण हो जाने के कारण ऑनलाइन माध्यमों से लॉकडाउन के तुरंत बाद ऑटा पदाधिकारियों का पुनर्निर्वाचन करा कर एक नई कार्यकारिणी के गठन और वर्तमान ऑटा को निवर्तमान मान लेने का प्रस्ताव किया है। उधर, ऑटा अध्यक्ष प्रो. रामसेवक दुबे ने कुलपति को पत्र लिखकर कहा है कि लॉकडाउन के कारण इविवि की परीक्षाओं और आगामी सत्र के संभावित विलंब को लेकर उन्होंने प्रस्ताव प्रेषित किया था। इसी प्रकार का प्रस्ताव दिल्ली विवि में भी आया था। इस विषय में कुछ शिक्षकों के वार्ता हुई थी, लेकिन यह प्रस्ताव उनका व्यक्तिगत विचार था। इविवि प्रशासन जो भी निर्णय लेगा, उसका स्वागत करेंगे।