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सीएम योगी पर नहीं चलेगा हत्या का मुकदमा
0 स्पेशल कोर्ट एमपीएमएलए ने निगरानी याचिका खारिज की, विपक्षी तलब अजीज पर भी मुकदमा चलाने की मांग खारिज
0 महराजगंज में मारपीट, बवाल के दौरान गोली लगने से हुई थी एक व्यक्ति की मौत
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर महराजगंज में दर्ज हत्या, बलवा, जानलेवा हमला आदि धाराओं में दर्ज मुकदमा नहीं चलेगा। स्पेशल कोर्ट एमपीएमएलए ने इस मामले में दाखिल निगरानी याचिका खारिज कर दी है। इसके साथ ही कोर्ट ने योगी आदित्यनाथ के पक्ष की ओर से दर्ज कराए गए क्रास केस पर उनके विपक्षी तलत अजीज पर मुकदमा चलाने की मांग भी खारिज कर दी है। इस मामले में सीजेएम महराजगंज ने पहले ही परिवाद खारिज कर दिया था। दोनों पक्षों ने सीजेएम के फैसले के खिलाफ निगरानी (रिवीजन) दाखिल की थी।
निगरानी याचिकाएं खारिज करते हुए स्पेशल कोर्ट जज पवन कुमार तिवारी ने कहा कि सीजेएम महराजगंज का आदेश विधि, तथ्यों एवं प्रक्रिया के तहत सही है, इसमें कोई त्रुटि नहीं है। इससे पूर्व कोर्ट में दोनों पक्षों के वकीलों ने कहा कि उन्होंने गलतफहमी में एक दूसरे के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया था। पुलिस की जांच में मामला झूठा पाया गया, इसलिए निगरानी का निस्तारण कर दिया जाए। विशेष लोक अभियोजक वीरेंद्र सिंह, एसपीओ जयगोविंद उपाध्याय, हरिओंकार सिंह, लाल चंदन, राधाकृष्ण मिश्र एडीजीसी राजेश गुप्ता और नीतीश कांत ने भी निगरानी निस्तारित करने की मांग की।
यह था मामला
घटना 11 फरवरी 1999 की महराजगंज कोतवाली की है। कब्रिस्तान की एक जमीन को लेकर तत्कालीन सांसद योगी आदित्यनाथ और सपा नेता तलत अजीज के बीच विवाद हुआ था। योगी की ओर से विवादित स्थान पर पेड़ लगवाए गए, जिसे दूसरे पक्ष ने कब्रिस्तान की जमीन बताते हुए अपना दावा किया। इसी मामले में तलत अजीज की एक सभा चल रही थी। उसी समय योगी आदित्यनाथ का काफिला उधर से गुजरा तो दोनों पक्षों के समर्थकों मेें विवाद हो गया। दोनों पक्षों की ओर से ईंट, पत्थर और गोलियां चलाईं गईं, जिसमें तलत अजीज के गनर सत्यप्रकाश यादव की मौत हो गई। दोनों पक्षों ने एक दूसरे पर अकारण हमला करने, जान से मारने की कोशिश, बलवा, हत्या आदि धाराओं में क्र्रास केस दर्ज कराया गया। प्रकरण की विवेचना सीबीसीआईडी ने की। विवेचना के निष्कर्ष में आया कि घटना उग्र भीड़ से संबंधित असामाजिक तत्वों के द्वारा ईंट, पत्थर, गोली चलाने से घटित हुई थी। काफी प्रयास के बाद भी भीड़ में शामिल असामाजिक तत्वों का नाम और पहचान नहीं हो पाई। पुलिस ने विवेचना के बाद अंतिम रिपोर्ट दाखिल कर दिया था। दोनों पक्षों की ओर से अंतिम रिपोर्ट के खिलाफ प्रोटेस्ट याचिका दाखिल कर चुनौती दी गई। सीजेएम ने प्रोटेस्ट याचिका को परिवाद के रूप में दर्ज कर लिया था। परिवाद की कार्यवाही पूरी करने के बाद सीजेएम ने 13 मार्च 2018 को दोनों परिवाद खारिज कर दिया था।
दोनों पक्षों ने की निगरानी निस्तारित करने की मांग
सीजेएम के आदेश के खिलाफ दोनों पक्षों ने फौजदारी निगरानी तलत अजीज बनाम योगी आदित्यनाथ और चंद्रसेन सिंह बनाम तलत अजीज जिला जज महराजगंज की कोर्ट में दाखिल किया। मामला हाईकोर्ट भी पहुंचा, हाईकोर्ट ने दोनों निगरानी याचिकाओं की सुनवाई एक साथ करने का निर्देश दिया। पत्रावली सुनवाई केलिए स्पेशल कोर्ट एमपीएमएलए में आई थी। सुनवाई के दौरान दोनों निगरानीकर्ता की ओर से अर्जी और शपथ पत्र प्रस्तुत कर कहा गया कि मूल वाद गलत फहमी में दाखिल कर दिया गया था। और संबंधित अपराध विवेचना में झूठा पाया गया और अपराध प्रमाणित नहीं हो सका है। इसलिए निगरानी याचिका निस्तारित की जाए।