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Prayagraj : चिल्ड्रेन अस्पताल में डिप्थीरिया से नौ वर्षीय बच्चे की हुई मौत, परिजनों ने किया हंगामा

Fri, 04 Oct 2024 02:42 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

कुछ देर बात पिता जब बेटे का शव लेकर इमरजेंसी वार्ड से बाहर आए तो अस्पताल प्रशासन ने इमरजेंसी का चैनल बंद कर दिया। आरोप है कि जब परिजनों ने शव ले जाने के लिए एंबुलेंस मांगी तो अस्पताल प्रशासन की ओर से निजी एंबुलेंस करने की नसीहत दी गई। मजबूरी में परिजनों को 1500 रुपये में एंबुलेंस करनी पड़ी।
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बच्चे की मौत के बाद दुखी परिजन। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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चिल्ड्रेन अस्पताल में बृहस्पतिवार को डिप्थीरिया से एक नाै वर्षीय बच्चे की माैत हो गई। मामले में परिजनों ने डाॅक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया। कुछ देर बात पिता जब बेटे का शव लेकर इमरजेंसी वार्ड से बाहर आए तो अस्पताल प्रशासन ने इमरजेंसी का चैनल बंद कर दिया। आरोप है कि जब परिजनों ने शव ले जाने के लिए एंबुलेंस मांगी तो अस्पताल प्रशासन की ओर से निजी एंबुलेंस करने की नसीहत दी गई। मजबूरी में परिजनों को 1500 रुपये में एंबुलेंस करनी पड़ी।

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करछना के खाई गांव निवासी नाै वर्षीय दिव्यांशु उर्फ मानस की पिछले कई दिनों से तबियत खराब थी। हालत खराब होने पर पिता जीत पांडेय 29 सितंबर को दिव्यांशु को लेकर शहर के एक निजी अस्पताल पहुंचे, जहां से अगले ही दिन बच्चे को चिल्ड्रेन अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया। इसके बाद 30 सितंबर को दिव्यांशु को चिल्ड्रेन अस्पताल लाया गया, जहां दो अक्तूबर की शाम सात बजे दिव्यांशु के गले का ऑपरेशन किया गया। इसके थोड़ी देर बाद उसे सांस लेने में परेशानी होने लगी।

चिकित्सकों की सलाह पर उसे ऑक्सीजन और भाप दी गई, मगर बच्चे को बचाया नहीं जा सका। चिकित्सकों का कहना है कि दिव्यांशु को डिप्थीरिया के सारे टीके नहीं लगे थे, जिसकी वजह से उसकी मौत हुई है। वहीं जब मरीज को इलाज के लिए अस्पताल लाया गया, तब उसकी हालत गंभीर थी और गले में सूजन भी थी। विदित हो कि प्रयागराज में इस वर्ष डिप्थीरिया से यह तीसरी मौत है।

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पिता बोले- बेटे ने एक-एक बूंद पानी के लिए तड़पकर दम तोड़ दिया

बेटे की मौत के बाद जीत पांडेय के आंसू नहीं थम रहे थे। बिलखते हुए उन्होंने बताया कि एक अक्टूबर की शाम सात बजे बेटे का ऑपरेशन हुआ, जिसके बाद चिकित्सकों ने 24 घंटे तक खाना व पानी देने से भी मना कर दिया। शाम करीब नौ बजे के बाद बेटा एक-एक बूंद पानी के लिए तड़पता रहा, लेकिन चिकित्सकों ने कुछ नहीं देने दिया। इस कारण उसकी जान चली गई।

क्या है डिप्थीरिया (गलाघोंटू)

नाक और गले की एक गंभीर संक्रामक बीमारी है। बैक्टीरिया सबसे अधिक श्वसन तंत्र को संक्रमित करता है। जब बैक्टीरिया श्वसन तंत्र की परत में प्रवेश करते हैं तो यह कमजोरी, गले में खराश, हल्का बुखार और गर्दन में सूजन पैदा कर सकता है। साथ ही बैक्टीरिया एक विष बनाता है, जो श्वसन प्रणाली में स्वस्थ ऊतकों को मार देता है। इसके बाद दो से तीन दिनों के भीतर, मृत ऊतक एक मोटी, भूरे रंग की परत बना लेता है जो गले या नाक में बन सकती है।
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कब-कब लगना चाहिए टीका

2 और 4 महीने की उम्र में पहली दो खुराकें
11 महीने में पहला बूस्टर
6, 11 से 13, 25, 45 और 65 साल की उम्र में आगे के बूस्टर
11 या 12 साल की उम्र में बड़े बच्चों को टीडीएपी टीका लगवाना चाहिए
वयस्कों को हर 10 साल में एक और टीडी या टीडीएपी टीका लगवाना चाहिए
गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था की तीसरी तिमाही के दौरान टीडीएपी टीका लगवाना चाहिए

बच्चे की मौत डिप्थीरिया से हुई है। टीका की हिस्ट्री में कोविड के समय टीका नहीं लगा था। जब उसे अस्पताल लाया गया, तब उसकी हालत गंभीर थी। -डॉ. अनुभा श्रीवास्तव, विभागाध्यक्ष, चिल्ड्रेन अस्पताल।

कोरोना संक्रमण के दौरान जिन बच्चों का टीकाकरण छूटा था, उसे विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से पूरा किया जा रहा है। अभी कुछ लोग जागरूकता के अभाव में टीका नहीं लगवा रहे हैं। -डॉ. आशु पांडेय, सीएमओ।
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