पिता बोले- बेटे ने एक-एक बूंद पानी के लिए तड़पकर दम तोड़ दिया
बेटे की मौत के बाद जीत पांडेय के आंसू नहीं थम रहे थे। बिलखते हुए उन्होंने बताया कि एक अक्टूबर की शाम सात बजे बेटे का ऑपरेशन हुआ, जिसके बाद चिकित्सकों ने 24 घंटे तक खाना व पानी देने से भी मना कर दिया। शाम करीब नौ बजे के बाद बेटा एक-एक बूंद पानी के लिए तड़पता रहा, लेकिन चिकित्सकों ने कुछ नहीं देने दिया। इस कारण उसकी जान चली गई।
क्या है डिप्थीरिया (गलाघोंटू)
नाक और गले की एक गंभीर संक्रामक बीमारी है। बैक्टीरिया सबसे अधिक श्वसन तंत्र को संक्रमित करता है। जब बैक्टीरिया श्वसन तंत्र की परत में प्रवेश करते हैं तो यह कमजोरी, गले में खराश, हल्का बुखार और गर्दन में सूजन पैदा कर सकता है। साथ ही बैक्टीरिया एक विष बनाता है, जो श्वसन प्रणाली में स्वस्थ ऊतकों को मार देता है। इसके बाद दो से तीन दिनों के भीतर, मृत ऊतक एक मोटी, भूरे रंग की परत बना लेता है जो गले या नाक में बन सकती है।
कब-कब लगना चाहिए टीका
2 और 4 महीने की उम्र में पहली दो खुराकें
11 महीने में पहला बूस्टर
6, 11 से 13, 25, 45 और 65 साल की उम्र में आगे के बूस्टर
11 या 12 साल की उम्र में बड़े बच्चों को टीडीएपी टीका लगवाना चाहिए
वयस्कों को हर 10 साल में एक और टीडी या टीडीएपी टीका लगवाना चाहिए
गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था की तीसरी तिमाही के दौरान टीडीएपी टीका लगवाना चाहिए
बच्चे की मौत डिप्थीरिया से हुई है। टीका की हिस्ट्री में कोविड के समय टीका नहीं लगा था। जब उसे अस्पताल लाया गया, तब उसकी हालत गंभीर थी। -डॉ. अनुभा श्रीवास्तव, विभागाध्यक्ष, चिल्ड्रेन अस्पताल।
कोरोना संक्रमण के दौरान जिन बच्चों का टीकाकरण छूटा था, उसे विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से पूरा किया जा रहा है। अभी कुछ लोग जागरूकता के अभाव में टीका नहीं लगवा रहे हैं। -डॉ. आशु पांडेय, सीएमओ।