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जारी होगा नया विज्ञापन, पर नहीं करना होगा आवेदन

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New advertisement will be issued, but will not apply
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प्रयागराज। अपर निजी सचिव (एपीएस) भर्ती-2013 की परीक्षा निरस्त करने के बाद उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) इस भर्ती का नया विज्ञापन जारी करेगा। हालांकि विज्ञापन जारी करने के बाद आवेदन नहीं लिए जाएंगे। इस भर्ती में वही अभ्यर्थी शामिल होंगे, जिन्होंने वर्ष 2013 के विज्ञापन के तहत आवेदन किए थे। इस बार परीक्षा के दौरान शॉर्ट हैंड में एक फीसदी गलती भी अनुमन्य नहीं होगी।
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एपीएस-2013 के तहत उत्तर प्रदेश सचिवालय में अपर निजी सचिव के 176 पदों पर भर्ती होनी है। इस भर्ती का विज्ञापन 13 दिसंबर 2013 को जारी किया गया था। आयोग के परीक्षा नियंत्रक अरविंद कुमार मिश्र की ओर से मंगलवार को जारी विज्ञप्ति के अनुसार इस भर्ती में उत्तर प्रदेश सचिवालय वैयक्तिक सहायक सेवा नियमावली, 2001 में विहित प्रावधानों का अनुपालन न होने के कारण एपीएस-2013 का विज्ञापन और उसके अनुसार हुई परीक्षा को निरस्त किया जाता है। अब सेवा नियमावली, 2001 के अनुसार नया विज्ञापन जारी कर चयन की प्रक्रिया शीघ्र शुरू की जाएगी।
आयोग के सचिव जगदीश का कहना है कि सेवा नियमावली, 2001 में शॉर्ट हैंड की परीक्षा में किसी भी प्रकार की गलती पर छूट दिए जाने का प्रावधान नहीं है, जबकि एपीएस-2013 में आठ फीसदी तक की गलती पर छूट दी गई। नए विज्ञापन में छूट का प्रावधान नहीं रहेगा। एक फीसदी गलती भी अनुमन्य नहीं होगी। परीक्षा में पुराने अभ्यर्थी ही शामिल होंगे। उन्हें नए सिरे से आवेदन नहीं करना होगा। आयोग के पास उनके रिकार्ड उपलब्ध हैं। इसी आधार पर उनके प्रवेश पत्र जारी किए जाएंगे और भर्ती प्रक्रिया छह माह में पूरी की जाएगी।
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हालांकि इतने कम समय में भर्ती के लिए तैयारी अभ्यर्थियों के लिए बड़ी चुनौती होगी। एपीएस-2013 के तहत पहले चरण की सामान्य अध्ययन एवं हिंदी की लिखित परीक्षा और दूसरे चरण की शॉर्ट हैंड एवं टाइट टेस्ट की परीक्षा हो चुकी थी। 1047 अभ्यर्थियों को कंप्यूटर ज्ञापन परीक्षा के लिए क्वालीफाई कराया जा चुका था। तीसरे चरण के लिए क्वालीफाई कर चुके अभ्यर्थी उमेश चंद्र पांडेय, अरविंद पांडेय, कौशलेंद्र सिंह, ठाकुर प्रताप तिवारी, अभिलाष श्रीवास्तव, आशुतोष पांडेय, जयकरन यादव, जगदीश गुप्ता का कहना है कि इतने कम समय में नए सिरे से परीक्षा की तैयारी कैसे की जा सकती है।
उनका कहना है कि मेहनत के बाद पहले और दूसरे चरण की परीक्षा पास की थी। 1047 अभ्यर्थी को कंप्यूटर ज्ञान परीक्षा की तैयारी में लगे हुए थे। इनमें से कई ओवरएज हो चुके हैं। अब फिर से किताबें खोलकर तैयारी करनी होगी। अभ्यर्थियों का आरोप है कि आयोग के अफसरों ने अपनी गर्दन बचाने के लिए परीक्षा निरस्त कर दी और अभ्यर्थियों के भविष्य से खिलवाड़ किया। एपीएस-2010 में भी शॉर्ट हैंड की परीक्षा में आठ फीसदी तक की गलती पर छूट दी गई थी। इस आधार पर आयोग ने एपीएस-2013 का विज्ञापन तो निरस्त कर दिया, लेकिन एपीएस-2010 के अभ्यर्थियों को ज्वाइन करा दिया। आयोग के पक्षपात पूर्ण रवैये से सिर्फ अभ्यर्थियों को नुकसान हुआ है।
बाईस साल में दो भर्तियां और दोनों में गड़बड़ी
प्रदेश सचिवालय वैयक्तिक सहायक सेवा नियमावली, 2001 लागू होने के बाद एपीएस की दो भर्तियों का विज्ञापन वर्ष 2010 एवं 2013 में जारी किया गया। दोनों ही भर्तियों में सेवा नियमावली का उल्लंघन किया गया। एपीएस-2010 के मामले में सीबीआई ने पूर्व परीक्षा नियंत्रक प्रभुनाथ के खिलाफ एफआईआर दर्ज की और एपीएस-2013 की भर्ती आयोग ने खुद निरस्त कर दी। इससे पहले वर्ष 1999 में एपीएस के पदों पर भर्ती हुई थी।
बर्बाद हो गए अभ्यर्थियों के आठ साल
एपीएस भर्ती-2013 के अभ्यर्थियों के आठ साल बर्बाद हो गए। प्रतियोगियों ने मांग की है कि एपीएस-2010 की तरह एपीएस-2013 की भी अलग से सीबीआई जांच कराई जाए। आयोग ने भी मान लिया है कि 2013 का विज्ञापन सेवा नियमावली के विपरीत जारी किया गया था। एपीएस-2010 के विज्ञापन में विज्ञापन में भी यही गड़बड़ी हुई थी। प्रतियोगी छात्रों का कहना है कि एपीएस भर्ती-2010 और एपीएस भर्ती-2013 दोनों की चयन प्रक्रियाएं लगभग एक समय में संपन्न हुईं हैं, जिनको सम्पादित कराने वाले आयोग के अधिकारी, कर्मचारी, विशेषज्ञ, परीक्षक सब एक ही हैं। प्रतियोगियों की मांग है कि दोनों भर्तियों में धांधली के लिए दोषी लोगों को चिह्नित करते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए।
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