उत्तर मध्य रेलवे (एनसीआर) का प्रयागराज मंडल देश के उन चुनिंदा रेल मंडलों में शामिल हो गया है जहां ढाई किमी से लंबी मालगाड़ी चली। प्रयागराज मंडल के खाते में यह उपलब्धि शनिवार की देर रात आई। यहां पहली बार चुनार और चोपन के बीच 2.7 किमी लंबी मालगाड़ी चली। इस मालगाड़ी में कुल 232 वैगन रहे।
अमूमन मालगाड़ी के एक रेक में डिब्बों की संख्या 20 से शुरू होकर 58 तक हो सकती है। हालांकि मालगाड़ी की एक रेक में लगाई जाने वाले डिब्बों की संख्या उनके साइज और लोड पर निर्भर करती है। कोरोना काल में रेलवे द्वारा सामानों की आवाजाही के लिए तमाम प्रयोग किए गए। इसी कड़ी में दो जुलाई 2020 को भारत के इतिहास की सबसे लंबी ट्रेन ‘शेषनाग’ को महाराष्ट्र में चलाया गया।
उस ट्रेन की लंबाई 2.8 किलोमीटर थी। इसके बाद जनवरी 2021 में 295 वैगन वाली ‘ वासुकि’ ट्रेन चलाई गई। जो अब तक की सर्वाधिक लंबी ट्रेन हैं। इसका संचालन छत्तीसगढ़ में हुआ। अब इसी कड़ी में एनसीआर में पहली बार 232 खाली वैगन की ट्रेेन चलाई। इस ट्रेन को ‘पिनाका’ नाम दिया गया। प्रयागराज मंडल के चुनार रेलवे स्टेशन पर बीती रात चार मालगाड़ी रेक को जोड़ा गया। इसमें मुख्य इंजन के रूप में मल्टी यूनिट लोको को जोड़ा गया।
58-58 वैगन के इस ट्रेन में कुल चार रेक जोड़े गए। पूरी ट्रेन में कुल छह इंजन लगाए गए। एनसीआर के सीपीआरओ डा. शिवम शर्मा ने बताया कि जोन में यह पहला मौका है कि जब यहां 2.7 किमी लंबी मालगाड़ी चलाई गई। चुनार से चोपन तक इसका संचालन हुआ। इसके बाद मालगाड़ी पूर्व मध्य रेलवे में 185.2 किमी तक चली। उन्होंने बताया कि एनसीआर में दो मालगाड़ी के रेक को जोड़कर उनका संचालन कई बार किया जा चुका है, लेकिन पहली बार चार रेक यहां एक साथ जोड़े गए।