ऐसे काम करेगा कवच
रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड आर्गनाइजेशन (आरडीएसओ) द्वारा विकसित इस प्रणाली को मेक इन इंडिया के तहत विकसित किया गया है। इसके तहत ट्रेनों को ट्रेन कोलिजन सुरक्षा प्रणाली से लैस किया जाएगा। रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेटिफिकेशन (आरएफएआई) उपकरणों से युक्त ट्रेनें हादसों से बच सकेंगी। ये सिस्टम यात्री रेल और मालगाड़ी ट्रेन दोनों में लगेंगे। पहला भाग स्टेशन पर तो दूसरा लोको इंजन में लगेगा। इस तकनीक में जब ऐसे सिग्नल से ट्रेन गुजरती है, जहां से गुजरने की अनुमति नहीं होती है तो इसके जरिये खतरे वाला सिग्नल भेजा जाता है। साथ ही लोको पायलट अगर ट्रेन को रोकने में विफल साबित होता है तो फिर ‘कवच’ तकनीक के जरिए से अपने आप ट्रेन के ब्रेक लग जाते हैं और हादसे से ट्रेन बच जाती है।
दो चरण में होगा काम
पहला चरण : छिपियाना बुजुर्ग से कानपुर (लागत- 179.95 करोड़)
दूसरा चरण : कानपुर से दीनदयाल उपाध्याय जं (लागत- 178.96 करोड़)
मथुरा-पलवल सेक्शन भी कवच से होगा लैस
उत्तर मध्य रेलवे आगरा मंडल का मथुरा-पलवल रेलखंड भी कवच से लैस होगा। इसके लिए रेलवे द्वारा कुल 30 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। दरअसल मथुरा-पलवल सेक्शन दिल्ली-मुंबई रेलमार्ग का ही हिस्सा है।
कवच प्रणाली को लेकर टेंडर प्रक्रिया चल रही है। यह मिशन रफ्तार का ही अभिन्न हिस्सा है। एनसीआर में प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट की देखरेख में काम शुरू हुआ है। महाप्रबंधक प्रमोद कुमार लगातार इस प्रोजेक्ट की खुद मॉनीटिरिंग कर रहे हैं। पहले चरण का टेंडर करनेक्स-केईसी कंसट्रक्शन को मिला है। - डा. शिवम शर्मा, सीपीआरओ, एनसीआर।