उत्तराखंड के मूल निवासी हैं बलवीर
बलवीर मूल रूप से उत्तराखंड के रहने वाले हैं। वह 2005 में वो संत बने थे। बता दें कि आनंद गिरि के निष्कासन के बाद बलवीर ही नंबर दो की हैसियत रखते थे। सीएम योगी आदित्यनाथ के आने पर बलवीर ही उनके ठीक बगल में बैठे थे। अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद और पंच परमेश्वर ने भी आज बलवीर गिरी को अपना आशीर्वाद दिया है।
गुरुवार को हो सकती है औपचारिक घोषणा
गुरुवार को महंत नरेंद्र गिरी का अंतिम संस्कार होने के बाद बलवीर गिरी के नाम का औपचारिक एलान किया जाएगा. बलवीर आज लगातार उसी कमरे में बैठे हुए हैं, जिसमें महंत नरेंद्र गिरी का पार्थिव शरीर रखा हुआ था। गौरतलब है कि मंहत ने सुसाइड नोट में उन्होंने बलवीर गिरी के नाम पर वसीयत करने की भी बात लिखी। इसके साथ ही उन्होंने लिखा कि प्रिय बलवीर मठ मंदिर की व्यवस्था का प्रयास वैसे ही करना, जैसे मैंने किया है, साथ ही आशुतोष गिरी, नितेश गिरि और मंदिर के सभी महात्माओं को बलवीर का सहयोग करने को कहा है।
महामंडलेश्वर कैलाशानंद महाराज का दावा- नरेंद्र गिरि लिखते नहीं थे
इन सब के बीच निरंजनी अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर कैलाशानंद महाराज ने दावा किया है कि पुलिस को जो सुसाइड नोट मिला है, उसमें महंत नरेंद्र गिरि की लिखावट नहीं है। उन्होंने कहा कि मैं उन्हें 20 साल से जानता हूं, नरेंद्र गिरि जी लिखते नहीं थे। यदि उनका लिखा हुआ किसी के पास कुछ है तो वह दिखाए। मुझसे अधिक उन्हें कोई नहीं जानता। मैं 2003 से उनसे, इस मठ से जुड़ा हुआ था। हर परिस्थिति में मैंने उनका साथ दिया। वह हस्ताक्षर भी बहुत मुश्किल से करते थे।