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नाम में परिवर्तन करना अभिव्यक्ति की आजादी का हिस्सा: हाईकोर्ट

Fri, 18 Dec 2020 08:48 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
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सीबीएसई - फोटो : social media
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि नाम बदलना अभिव्यक्ति की आजादी का हिस्सा है। जिसकी संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए) में गारंटी दी गई है। अभिव्यक्ति की आजादी के तहत किसी व्यक्ति को उसका नाम बदलने से नहीं रोका जा सकता है। कोर्ट ने सीबीएसई बोर्ड को निर्देश दिया है कि वह याची को रिशू जायसवाल के स्थान पर कबीर जायसवाल के नाम से नया प्रमाणपत्र जारी करे। क्योंकि याची अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के तहत अपना नाम परिवर्तित करने का हकदार है। 
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कबीर उर्फ रिशू जायसवाल की याचिका पर यह आदेश न्यायमूर्ति पंकज भाटिया ने दिया है। याची का कहना था उसने सीबीएसई बोर्ड से हाईस्कूल की परीक्षा वर्ष 2011-13 में उत्तीर्ण की और इंटरमीडिएट की 2015 में रिशू जायसवाल पुत्र संतोष कुमार जायसवाल के नाम से उत्तीर्ण की है। इसके बाद याची ने अपना रिशू की जगह कबीर जायसवाल करने के लिए गजट नोटिफिकेशन करवाया और नोटिस प्रकाशित करवाई तथा बोर्ड को भी प्रार्थनापत्र दिया।

गजट नोटिफिकेशन के आधार पर पैन कार्ड और आधार कार्ड में उसका नाम बदला जा चुका है। मगर सीबीएससी बोर्ड ने उसके शैक्षणिक प्रमाणपत्रों में नाम परिवर्तित करने का प्रार्थनापत्र यह कहते हुए निरस्त कर दिया कि स्कूल के दस्तावेजों में उसका नाम नहीं बदला हुआ है। इसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई। हाईकोर्ट ने बोर्ड को उसके परिवर्तित नाम कबीर जायसवाल के नाम से नया  प्रमाणपत्र जारी करने का निर्देश दिया है।
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