निरीक्षण के लिए नैनी जेल पहुंची डीजी जेल पीवी रामाशास्त्री।
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कैसे फरार हुआ, जेल प्रशासन के लिए बनी अनसुलझी पहेली
केंद्रीय कारागार नैनी में शनिवार को बाग कमान के लिए निकला कैदी कालीचरण उर्फ बऊवा कैसे फरार हुआ यह जेल प्रशासन के लिए अनसुलझी पहेली बन गई है। तीन दिन बीत जाने के बाद भी जेल प्रशासन के अधिकारी अभी तक यह स्पष्ट नहीं कर सके कि वह कैसे फरार हुआ। हालांकि, जेल प्रशासन का दावा है कि वह बाहरी दीवार फांदकर फरार हुआ है। अब सवाल यह उठता है कि जेल की बाहरी दीवार 20 मीटर ऊंची है, ऐसे में उसने कैसे दीवार फांदी। मामले में मुख्य वार्डर समेत चार जेलकर्मी निलंबित किए जा चुके हैं।
किशोरी के साथ सामूहिक दुष्कर्म के मामले में 26 जुलाई 2023 को 20 साल की कैद और 32 हजार अर्थदंड की सजा सुनाए जाने के बाद बीते नौ मार्च को उसे केंद्रीय कारागार नैनी में निरुद्ध किया गया था। उसके फरार होने के मामले में कहां और कैसे चूक हुई, इसे लेकर मंगलवार को अधिकारी बंदीरक्षकों और साथ में कमान को निकले कैदियों से पूछताछ करते हुए उनके बयानों का मिलान करते रहे। इस दौरान पता चला कि कमान में 22 बंदियों को साथ में निकाला गया था लेकिन वापस आते समय उनकी गिनती नहीं की गई।
जेल के अंदर और बाहर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज पर नजर
जेल प्रशासन जेल परिसर और पुलिस बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज खंगाल रही है। कारापाल अंजनी कुमार गुप्ता द्वारा पुलिस को दी गई तहरीर में बताया गया कि जेल की चक्र संख्या दो से शनिवार दोपहर करीब तीन बजे बाग कमान निकाली गई थी। इसी के साथ बंदी कालीचरण को भी निकाला गया था। इस दौरान बंदी कालीचरण कहीं गायब हो गया। जेल परिसर में उसकी तलाश करने के साथ ही परिसर में तथा परिसर के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज खंगाली जा रही है।
मामले में जेल प्रशासन द्वारा चक्र संख्या दो में लगे कैमरे की फुटेज को भी खंगालते हुए उसकी गतिविधियों को देखा जा रहा है। किन बंदियों के साथ उसका तालमेल अधिक था और कमान में उसके साथ निकले 22 बंदियों में उसके मददगार बंदी की भी तलाश जेल प्रशासन कर रहा है। जेल प्रशासन का मानना है कि बिना किसी की सहायता के वह जेल से फरार होने में कामयाब नहीं हो सकता। साथ ही कमान में किसी बंदी द्वारा क्या समान ले जाया गया था और वापसी में सभी सामान वापस आए कि नहीं इसकी भी जांच पड़ताल की जा रही है।
पेड़ के सहारे दीवार पर चढ़कर फरार होने की भी आशंका
जेल सूत्रों का मानना है कि कैदी जेल की बाहरी दीवार के पास पेड़ के सहारे ऊपर चढ़कर फरार हुआ। हालांकि, जेल में लगे सीसीटीवी कैमरे में कहीं भी यह स्पष्ट नहीं हो सका है। दरअसल कृषि फार्म महिला बैरक के पास पहुंचे जेल अधिकारियों ने देखा कि पुरानी और नई दीवार के बीच यहां दूरी कम है। कम आवाजाही के कारण काफी झाड़ियां और दीवार पर बेलेें भी चढ़ गई हैं। आशंका यह भी है कि पेड़ और बेलों के सहारे ही कैदी दीवार पर चढ़ा और फिर बाहर की ओर निकल गया।
हालांकि, जेल अधिकारी इस आशंका को खारिज कर रहे हैं। उनका कहना है कि जेल की दीवार की निगरानी के लिए वॉच टॉवर बने हैं। इसमें बड़ी-बड़ी लाइटें लगाई गई हैं। जेल की मुख्य दीवार, जो परिसर या प्रवेश द्वार से सटी है, वहां पर सीसीटीवी कैमरा लगा हुआ है। सीसीटीवी कैमरे में कहीं भी बंदी के दीवार फांदने की तस्वीर कैद नहीं हुई है। इस मामले में एक खास बात यह भी है कि शनिवार को जेल बंद होने के दौरान ही घटना की जानकारी जेल अधिकारियों को मिल गई थी। हालांकि, मामले में नैनी पुलिस से शिकायत रविवार को की गई। पूरे जेल में तलाशी और खोजबीन के बाद जेल प्रशासन ने यह कार्रवाई की।
स्टेशन, बस अड्डे और चौराहे पर लगे कैमरों की फुटेज भी खंगाली
फरार कैदी कालीचरण को पकड़ने के लिए बनाई गईं टीमों ने नैनी, छिवकी स्टेशन के साथ चौराहे पर लगे कैमरों की फुटेज भी खंगाली। पुलिस का मानना है कि जेल से फरार होने के बाद वह किसी न किसी साधन से ही भागा होगा। यदि वह कसी ट्रेन से भागा होगा तो स्टेशन पर लगे कैमरे में उसकी तस्वीर जरूर कैद हुई होगी।
पांच सदस्यीय कमेटी करेगी कैदी के जेल से फरार होने की जांच
केंद्रीय कारागार नैनी से एक दिन पहले कैदी के फरार होने के मामले की जांच पांच सदस्यीय कमेटी करेगी। डीआईजी स्तर के अधिकारी की अध्यक्षता में बनने वाली इस कमेटी में चार अन्य अफसर शामिल होंगे। अफसर जल्द ही मुख्यालय स्तर से नामित किए जाएंगे। यह आदेश मंगलवार को डीजी जेल पीवी रामाशास्त्री ने दिए।
कैदी के जेल से फरार होने की घटना सुरक्षा में चूक मानी जा रही है। कारागार मुख्यालय स्तर से इस घटना को बेहद गंभीरता से लिया गया है। मंगलवार को निरीक्षण के लिए आए डीजी जेल ने इस मामले में अधिकारियों से जानकारी ली। घटनाक्रम जानने के बाद प्रारंभिक स्तर पर लापरवाही पर संबंधित कर्मियों के खिलाफ की गई कार्रवाई के बारे में भी पूछा।
इसके बाद आदेश दिया कि इस प्रकरण की विस्तृत जांच पांच सदस्यीय कमेटी से कराई जाए। कमेटी में डीआईजी, दो वरिष्ठ जेल अधीक्षक व दो जेल अधीक्षक स्तर के अफसर शामिल हाेंगे। यह कमेटी घटना की विस्तृत जांच करेगी और पता लगाएगी कि सुरक्षा में कहां व किस स्तर पर चूक हुई। पर्यवेक्षण करने वाले अफसरों की भूमिका की भी जांच करेगी।
डीआईजी जेल राजेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि डीजी जेल ने मामले की विस्तृत जांच पांच सदस्यीय कमेटी से कराने का आदेश दिया है। मुख्यालय स्तर से अफसर नामित किए जाएंगे। कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर आगे मुख्यालय कार्रवाई का निर्णय लेगा। बता दें कि डीजी जेल का केंद्रीय कारागार नैनी और जिला कारागार नैनी का निरीक्षण पूर्व निर्धारित था।
पूर्व कार्यक्रम के अनुरूप ही उन्होंने निरीक्षण किया। संयोग ही था कि उनके कार्यक्रम से एक दिन पहले ही यह घटना हो गई। वैसे उनके निरीक्षण के बाद तय माना जा रहा है कि मामले में जेल प्रशासन के जिम्मेदारों की भूमिका तय की जाएगी।