मुहैया करवाई जाती है मुफ्त में पुस्तकें
सूत्रों ने बताया कि बंदियों के विश्वविद्यालय में प्रवेश के बाद इनको मुफ्त में प्रबंधन की तरफ से पुस्तकें मुहैया करवाई जाती हैं। इसके बाद यह दिन-रात पढ़ाई करते हैं। इन बंदियों के पास न तो इंटरनेट और ना ही पढ़ाई के लिए कोई ऑनलाइन सुविधा रहती है। सिर्फ ऑफलाइन ही जेल की चार दिवारी के बीच पढ़ाई करते हैं। इनके पढ़ाई के लिए पुस्तकें विश्वविद्यालय देता है और परीक्षा नैनी सेंट्रल जेल में होती है।
पांचवीं से आठवीं में साै से ज्यादा बंदी
नैनी सेंट्रल जेल में इस दाैरान 100 से ज्यादा ऐसे बंदी है, जो पांचवीं से आठवीं में पढ़ाई कर रहे हैं। इसके लिए बाकायदा जेल की पांच में से चार सर्किल में क्लास चलती है। इसमें भी पुरुष बंदी के साथ-साथ महिला बंदी भी शामिल हैं। यहां पर बंदियों को नैतिक शिक्षा प्रदान की जाती है। ताकि वे अच्छे नागरिक बन सकें।
जुलाई-अगस्त से शुरू होगा दसवीं-बारहवीं का आवेदन
दसवीं-बारहवीं में पढ़ाई के लिए जुलाई-अगस्त में इच्छुक बंदियों से आवेदन करवाया जाएगा। बताया गया कि इन कक्षाओं के लिए नैनी, फतेहपुर, चित्रकूट, काैशाम्बी, प्रतापगढ़, हमीरपुर, बांदा समेत अन्य जगहों की जेल में अगर कोई आवेदन करता है तो उसकी परीक्षा जिला बांदा जेल में करवाई जाती है। यानी यहां के जेलों में बंद अगर कोई बंदी दसवीं-बारहवीं की परीक्षा देने चाहता है ताे उसे बांदा के जेल में ही परीक्षा देना पड़ेगा।
फाउंडेशन दे रहा बंदियों को शिक्षा
दूसरी तरफ, नैनी सेंट्रल जेल में शिव नाडर फाउंडेशन की तरफ से भी बंदियों को साक्षर करने की एक मुहीम चलाई जा रही है। अबतक चले 24-25 के दो बैच में बंदियों को साक्षर प्रमाणपत्र दे दिया गया है। जबकि 25 बंदियों के एक बैच की पढ़ाई चल रही है। कंप्यूटर और प्रोजेक्टर से 45 दिनों के कोर्स काे पूरा करने के लिए प्रत्येक सोमवार से शनिवार रोजाना दो घंटे क्लास चलती है। इनमें 18 से लेकर 80 वर्ष उम्र के बंदी शामिल है। कुल तीन बैच में 74 महिला पुरुष बंदी को चिन्हित किया गया है।