यूपी विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब निकाय चुनाव पर सबकी नजर टिकी हुई है। निकाय चुनाव को पांच वर्ष पूरे होने वाले हैं। नगर निगम सदन को मई में पांच वर्ष पूरे हो जाएंगे, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए उम्मीद कम ही है कि चुनाव समय से कराए जा सकेंगे। इस बार नए परिसीमन के आधार पर चुनाव होना है, लेकिन अब तक परिसीमन की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई। परिसीमन हुआ तो वार्डों के साथ उनके आरक्षण की स्थिति भी बदलेगी और इस पूरी प्रक्रिया में सात से आठ माह का समय लग जाएगा।
नगर निगम का चुनाव पिछली बार ही नए परिसीमन के तहत होना था लेकिन सरकार ने जल्दबाजी में चुनाव करा दिया। 2012 का चुनाव वर्ष 2001 की जनगणना के आधार पर कराया गया था, जबकि मांग की जा रही थी कि 2011 की जनगणना के तहत नए सिरे से परिसीमन हो और इसके बाद चुनाव कराया जाए। फिलहाल ऐसा नहीं हुआ, लेकिन इस बार नया परिसीमन होने की पूरी उम्मीद है। अब यह प्रदेश की नई सरकार पर निर्भर करता है कि वह नए परिसीमन पर क्या निर्णय लेती है।
परिसीमन होता है तो झूंसी, फाफामऊ, नैनी, झलवा समेत कई इलाकों के गांव शहरी सीमा में शामिल हो जाएंगे। ऐसे में वार्डों की संख्या तो बढ़ेगी ही, वार्डों के आरक्षण की स्थिति भी बदलेगी। सूत्रों का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया में सात से आठ माह का समय लगेगा। हालांकि पंचस्थानीय चुनाव कार्यालय की ओर से वोटर लिस्ट पुनरीक्षण का काम काफी आगे निकल चुका है। परिसीमन की व्यवस्था लागू होने पर वोटर लिस्ट पर भी नए सिरे से काम होगा।